Loan Scams : नई दिल्ली। उद्योगपति अनिल अंबानी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को करीब सात घंटे तक पूछताछ की। यह कार्रवाई रिलायंस ग्रुप की कंपनियों द्वारा कथित तौर पर बैंकों से लिए गए करीब 17,000 करोड़ रुपये के ऋण और उसमें हुए कथित गड़बड़ी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में की गई। यह पूछताछ मनी लॉन्ड्रिंग की रोकथाम से जुड़े कानून (PMLA) के तहत की जा रही है।
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सूत्रों के मुताबिक, अनिल अंबानी सुबह करीब 11 बजे मुंबई स्थित ईडी के कार्यालय पहुंचे और शाम करीब छह बजे तक अधिकारियों के सवालों के जवाब देते रहे। ईडी की जांच का केंद्र यह पता लगाना है कि रिलायंस ग्रुप की कंपनियों ने बैंकों से लिए गए लोन का उपयोग किस प्रकार किया और क्या उसमें किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता हुई।
यह मामला कई बैंकों की ओर से दर्ज कराई गई शिकायतों पर आधारित है, जिनमें आरोप है कि लोन की रकम को गलत तरीके से डायवर्ट किया गया और कई कंपनियों को शेल कंपनियों के ज़रिए ट्रांसफर किया गया। इसी सिलसिले में ईडी ने कुछ दिन पहले अनिल अंबानी के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) भी जारी किया था, जिससे उन्हें देश से बाहर जाने से रोका जा सके।
ईडी ने हाल ही में रिलायंस ग्रुप की कई कंपनियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के दस्तावेज़ भी जब्त किए हैं। जांच एजेंसी इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि लोन लेने की प्रक्रिया में किस प्रकार की गारंटी और दस्तावेज़ पेश किए गए थे और क्या उनमें कोई फर्जीवाड़ा हुआ।
अनिल अंबानी की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि उन्होंने सभी सवालों के जवाब दिए हैं और जांच में सहयोग का आश्वासन दिया है।
यह पूछताछ ऐसे समय पर हुई है जब देश में आर्थिक अपराधों को लेकर निगरानी तेज हो गई है और कई बड़े कारोबारी ईडी के रडार पर हैं। एजेंसी आने वाले दिनों में अनिल अंबानी को दोबारा भी पूछताछ के लिए बुला सकती है।
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इस बीच, बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला भारतीय वित्तीय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है। यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो यह देश के कॉरपोरेट गवर्नेंस ढांचे के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है। ईडी की ओर से इस केस में आगे की जांच जारी है और अन्य संबंधित अधिकारियों और संस्थानों से भी पूछताछ की जा सकती है।











