Khairagarh Collectorate Suicide Attempt : खैरागढ़ (09 फरवरी 2026): जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट परिसर में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब गंडई क्षेत्र के एक ग्रामीण ने प्रशासन के सामने खुद को आग लगाने का प्रयास किया। पीड़ित अपने गांव में हो रहे सामाजिक बहिष्कार से इस कदर टूट चुका था कि उसने मौत को गले लगाने का फैसला कर लिया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों और कर्मचारियों ने तत्काल उसे रोककर सुरक्षित किया, जिससे एक बड़ा हादसा होने से बच गया।
क्या है पूरी घटना?
मिली जानकारी के अनुसार, गंडई के ग्राम कटंगी निवासी शीतलाल निर्मलकर अचानक कलेक्ट्रेट पहुँचा और अपनी जेब से मिट्टी तेल की बोतल निकालकर खुद पर उड़ेल लिया। इससे पहले कि वह माचिस जला पाता, सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे दबोच लिया। छीना-झपटी के दौरान वह हल्का झुलस गया है। उसे तत्काल उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, जहाँ चिकित्सकों ने उसकी हालत खतरे से बाहर बताई है।
सामाजिक बहिष्कार का दंश
शीतलाल ने आरोप लगाया है कि वह और उसका परिवार लंबे समय से गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा किए गए सामाजिक बहिष्कार का सामना कर रहे हैं। उसे समाज से अलग-थलग कर दिया गया है, जिसका सीधा असर उसके बच्चों की पढ़ाई और परिवार की आजीविका पर पड़ रहा है। पीड़ित का कहना है कि वह इसकी शिकायत कई बार स्थानीय प्रशासन और पुलिस से कर चुका था, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से वह मानसिक रूप से प्रताड़ित महसूस कर रहा था।
प्रशासनिक अमले में खलबली
दिनदहाड़े कलेक्ट्रेट जैसे सुरक्षित परिसर में हुई इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और जनसुनवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद कलेक्ट्रेट की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गंडई पुलिस और तहसील प्रशासन से इस सामाजिक बहिष्कार के मामले की विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
दोषियों पर होगी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छत्तीसगढ़ में सामाजिक बहिष्कार जैसे कृत्य कानूनन अपराध हैं। शीतलाल के आरोपों की जांच की जा रही है और गांव के जो भी प्रभावशाली लोग इस बहिष्कार में शामिल पाए जाएंगे, उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, शीतलाल को अस्पताल में मनोवैज्ञानिक परामर्श और सुरक्षा प्रदान की जा रही है।









