नई दिल्ली। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कर्नाटक की अलंद विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में गड़बड़ी का मामला उठाते हुए चुनाव आयोग (EC) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। खड़गे ने रविवार को कहा कि ऐसा लगता है मानो चुनाव आयोग अब भाजपा का “बैक ऑफिस” बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने वोटर फ्रॉड से जुड़ी अहम जानकारी देना बंद कर दिया है और दोषियों को बचाया जा रहा है।
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खड़गे ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मई 2023 विधानसभा चुनाव से पहले अलंद क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम हटाए गए थे। इस मामले की जांच के दौरान शुरुआत में चुनाव आयोग ने कुछ दस्तावेज जरूर उपलब्ध कराए, लेकिन अब आयोग महत्वपूर्ण सबूत देने से इनकार कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि यह रवैया वास्तविक गुनहगारों को बचाने की साजिश है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि फरवरी 2023 में दर्ज मामले की जांच में 5,994 जाली आवेदन सामने आए, जो वोटर फ्रॉड की बड़ी साजिश का स्पष्ट सबूत है। इसके बाद कांग्रेस सरकार ने सीआईडी जांच का आदेश भी दिया था। खड़गे ने सवाल उठाया कि आयोग किसे बचा रहा है—क्या भाजपा के वोट चोरी विभाग को? क्या सीआईडी जांच को पटरी से उतारने का दबाव डाला जा रहा है?
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उधर, चुनाव आयोग ने खड़गे के ताजा आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि पहले भी EC कांग्रेस और विपक्ष के आरोपों को “बेबुनियाद” बता चुका है। आयोग का कहना था कि मतदाता सूची और चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी है और किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं है।
इससे पहले, 7 अगस्त को राहुल गांधी ने भी चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने दावा किया था कि वोटर लिस्ट में बड़ी गड़बड़ी हुई और मशीन रीडेबल वोटर लिस्ट न देकर चुनाव आयोग ने भाजपा के साथ मिलकर “चुनाव चोरी” किया। राहुल ने यहां तक कहा था कि महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में भी यही मॉडल अपनाया गया।
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कर्नाटक की इस सीट पर जारी विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर सियासी गर्मी बढ़ा रहा है। कांग्रेस लगातार चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठा रही है, जबकि भाजपा और आयोग इन आरोपों को खारिज करते आए हैं।













