निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : कर्नाटक में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया है। नागरिक अधिकार प्रवर्तन निदेशालय के महानिदेशक (DG) डॉ. के. रामचंद्र राव को एक महिला के साथ कार्यालय के भीतर आपत्तिजनक स्थिति में दिखाए जाने का दावा किया गया है। वीडियो सामने आते ही राज्य सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया।
DPAR ने जारी किया निलंबन आदेश
कर्नाटक सरकार के कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग (DPAR) ने निलंबन आदेश जारी करते हुए कहा कि मीडिया प्लेटफॉर्म और न्यूज चैनलों पर प्रसारित वीडियो में अधिकारी का आचरण एक सरकारी सेवक के लिए अशोभनीय और अश्लील प्रतीत होता है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि यह मामला सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने वाला है।
Karnataka viral video row: K Ramachandra Rao, Director General of Police, Directorate of Civil Rights Enforcement, suspended. pic.twitter.com/3sxVU41qax
— Press Trust of India (@PTI_News) January 20, 2026
आचरण नियमों के उल्लंघन का प्रथम दृष्टया मामला
सरकार की प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि डॉ. के. रामचंद्र राव का कथित व्यवहार अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियम, 1968 के नियम-3 का उल्लंघन करता है। इसी आधार पर सरकार ने जांच पूरी होने तक उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का फैसला लिया।
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जांच पूरी होने तक रहेंगे निलंबित
सरकारी आदेश के अनुसार, जांच लंबित रहने की अवधि में डॉ. के. रामचंद्र राव को अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियम, 1969 के तहत निर्वाह भत्ता मिलेगा। हालांकि, वे राज्य सरकार की लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।
सरकार का सख्त संदेश: कोई भी कानून से ऊपर नहीं
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य में कोई भी अधिकारी कानून से ऊपर नहीं है। यदि कोई अधिकारी नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने यह भी कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी।
IPS अधिकारी ने आरोपों को बताया फर्जी
वहीं, डॉ. के. रामचंद्र राव ने अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने वायरल वीडियो को फर्जी और मनगढ़ंत बताया और कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई है। अधिकारी ने संकेत दिए हैं कि वे इस मामले में कानूनी विकल्पों पर विचार करेंगे।
प्रशासनिक हलकों में चर्चा तेज
इस घटनाक्रम के बाद कर्नाटक के प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। एक सीनियर आईपीएस अधिकारी पर लगे इस तरह के आरोपों ने सरकारी सेवा में नैतिकता और अनुशासन को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।













