Jhiram Ghati incident : रायपुर: छत्तीसगढ़ में झीरम घाटी हमले को लेकर जारी बयानबाजी ने नया मोड़ ले लिया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उज्ज्वल दीपक ने कहा है कि कांग्रेस पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है। विकास तिवारी द्वारा झीरम मामले में अपनी ही पार्टी के नेताओं के नार्को टेस्ट की मांग करना कांग्रेस को इतना नागवार गुजरा कि उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया गया।
भाजपा के आरोपों के मुख्य बिंदु:
सच बोलने की सजा: उज्ज्वल दीपक ने विकास तिवारी के निष्कासन को ‘सच बोलने की सजा’ करार दिया। उन्होंने कहा कि दूसरों पर कीचड़ उछालने वाली कांग्रेस को जब अपने भीतर की गंदगी साफ करने की सलाह मिली, तो उन्होंने सलाह देने वाले को ही निकाल दिया।
नार्को टेस्ट पर दोहरी नीति: भाजपा ने सवाल उठाया कि कांग्रेस नेता जेपी नड्डा और डॉ. रमन सिंह के नार्को टेस्ट की मांग तो करते हैं, लेकिन जब खुद के नेताओं के टेस्ट की बात आती है, तो वे बेचैन क्यों हो जाते हैं?
भूपेश बघेल के ‘सबूत’ पर सवाल: उज्ज्वल दीपक ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर निशाना साधते हुए पूछा कि वे जेब में सबूत लेकर घूमने का दावा करते थे, फिर 5 साल की सरकार में उन्होंने उन सबूतों को पेश क्यों नहीं किया? उन्होंने न्यायिक आयोग की रिपोर्ट को विधानसभा में न रखने पर भी सवाल उठाए।
नक्सली-कांग्रेस ‘दोस्ताना’: भाजपा ने आरोप लगाया कि झीरम हमले के बाद से कांग्रेस के भीतर ही एक-दूसरे पर संदेह की स्थिति है। क्या नक्सलियों के साथ ‘भाईचारा’ उन दिग्गज नेताओं की शहादत पर भारी पड़ रहा है?
विवाद की पृष्ठभूमि:
हाल ही में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बयान दिया था कि 2013 के झीरम हमले में कांग्रेस के ही कुछ ‘इनसाइडर’ (अंदरूनी लोग) शामिल थे। इस बयान के बाद कांग्रेस प्रवक्ता विकास तिवारी ने कथित तौर पर पार्टी लाइन से हटकर कांग्रेस नेताओं के नार्को टेस्ट की मांग कर दी थी, जिसके बाद उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया।













