जबलपुर: शहपुरा क्षेत्र स्थित बालाजी सॉल्यूशंस इथेनॉल फैक्ट्री पर जिला प्रशासन की छापामार कार्रवाई अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। साबुत धान से भरे ट्रकों के फैक्ट्री परिसर में पहुंचने की शिकायत पर एसडीएम और पुलिस की टीम मौके पर तो पहुंची, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता ही होती दिखाई दी।
मुखबिर की सूचना पर पहुंचा प्रशासन
प्रशासन को मुखबिर के माध्यम से सूचना मिली थी कि इथेनॉल फैक्ट्री में साबुत धान और चावल से भरे ट्रक पहुंच रहे हैं, जबकि नियमों के अनुसार इथेनॉल निर्माण के लिए केवल नीलामी में खरीदा गया खराब धान या मक्का ही इस्तेमाल किया जा सकता है।
मौके पर मिले 28 ट्रक, फिर भी ठोस कदम नहीं
जब एसडीएम और पुलिस की टीम फैक्ट्री पहुंची तो वहां धान और चावल से भरे कुल 28 ट्रक मौजूद पाए गए। इसके बावजूद प्रशासन ने न तो किसी ट्रक को जब्त किया और न ही मौके पर कोई स्वतंत्र जांच शुरू की।
जांच की जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन को ही सौंप दी
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि एसडीएम की टीम ने जांच की जिम्मेदारी फैक्ट्री प्रबंधन को ही सौंप दी। प्रबंधन को स्वयं रिपोर्ट और दस्तावेज तैयार कर 24 घंटे के भीतर प्रस्तुत करने के निर्देश देकर प्रशासनिक टीम फैक्ट्री से लौट आई।
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एसडीएम को फैक्ट्री में प्रवेश नहीं मिला
सूत्रों के मुताबिक एसडीएम को फैक्ट्री के अंदर प्रवेश तक नहीं दिया गया, इसके बावजूद प्रशासन ने कोई सख्त रुख नहीं अपनाया। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या जिला प्रशासन फैक्ट्री संचालकों के सामने नतमस्तक नजर आया?
कार्रवाई पर उठ रहे गंभीर सवाल
बिना शिकायत का पूर्ण सत्यापन किए लौट आना और जांच का जिम्मा उसी पक्ष को सौंप देना, जिस पर आरोप हैं—प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर रहा है। मामले में FCCI द्वारा नीलामी से चावल खरीदी की बात जरूर कही जा रही है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि अब तक नहीं हुई है।











