Wednesday, September 2, 2026
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‘Indore Cleanliness: स्वच्छता सिर्फ पोस्टर से नहीं, व्यवहार परिवर्तन से आएगी’ इंदौर कार्यशाला में बोले फीडबैक फाउंडेशन के CEO अजय सिन्हा, पाठ्यक्रम में भारतीय स्वच्छता परंपरा शामिल करने की वकालत

‘Indore Cleanliness: इंदौर। देश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) को और प्रभावी बनाने की दिशा में इंदौर में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के उद्देश्य से शनिवार को इंदौर सिटी बस कार्यालय में आयोजित इस कार्यशाला में स्वच्छता, कचरा प्रबंधन और जनभागीदारी जैसे अहम विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यशाला की अध्यक्षता इंदौर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने की, जबकि फीडबैक फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) अजय सिन्हा ने मुख्य वक्ता के रूप में स्वच्छता को लेकर समाज और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया।

‘स्वच्छता केवल अभियान नहीं, जीवनशैली का हिस्सा बने’

कार्यशाला को संबोधित करते हुए अजय सिन्हा ने कहा कि स्वच्छता केवल पोस्टर, नारों या सरकारी अभियानों से नहीं आएगी, बल्कि लोगों के व्यवहार में बदलाव आने पर ही वास्तविक परिवर्तन संभव होगा।

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उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक जीवनशैली में कचरा उत्पन्न करने की संस्कृति कभी नहीं रही। पहले लोग वस्तुओं का पुनः उपयोग (Reuse) और पुनर्चक्रण (Recycle) करते थे, जिससे अपशिष्ट बहुत कम पैदा होता था। आधुनिक जीवनशैली के कारण यह परंपरा कमजोर हुई है, जिसे फिर से मजबूत करने की जरूरत है।

‘भारतीय स्वच्छता संस्कृति को शिक्षा का हिस्सा बनाया जाए’

‘Indore Cleanliness: अजय सिन्हा ने कहा कि जब भारतीय विदेशों की यात्रा करते हैं तो वहां की साफ-सफाई और अनुशासन की सराहना करते हैं, लेकिन अपने देश में वही व्यवहार नहीं अपनाते।उन्होंने सुझाव दिया कि भारत की स्वच्छता संस्कृति, पारंपरिक जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मूल्यों को स्कूलों और कॉलेजों के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी बचपन से ही स्वच्छता को अपनी जिम्मेदारी समझे और उसे व्यवहार में उतारे।

महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने फ्लोटिंग पॉपुलेशन पर दिया जोर

‘Indore Cleanliness: इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि इंदौर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां हर दिन बड़ी संख्या में अन्य शहरों और राज्यों से लोग आते हैं। ऐसे में फ्लोटिंग पॉपुलेशन के लिए भी अलग दिशा-निर्देश तैयार किए जाने चाहिए, ताकि उन्हें शहर की स्वच्छता व्यवस्था, कचरा पृथक्करण और नागरिक जिम्मेदारियों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।उन्होंने कहा कि इंदौर ने देश में स्वच्छता के क्षेत्र में जो पहचान बनाई है, उसे बनाए रखने के लिए हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।

जनभागीदारी से ही सफल होगा स्वच्छता अभियान

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि स्वच्छता को केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं माना जा सकता। जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही स्वच्छता अभियान को स्थायी सफलता मिल सकती है।विशेषज्ञों ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, कचरे के वैज्ञानिक निपटान, स्रोत पर कचरा पृथक्करण और जनजागरूकता बढ़ाने पर भी विस्तृत चर्चा की।

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जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने लिया भाग

‘Indore Cleanliness: कार्यशाला में शहर के जनप्रतिनिधि, पार्षद, नगर निगम के अधिकारी तथा स्वच्छता और कचरा प्रबंधन से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। सभी ने इंदौर की स्वच्छता व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा नागरिक सहभागिता बढ़ाने के लिए अपने सुझाव साझा किए।कार्यशाला का मुख्य संदेश यही रहा कि स्वच्छ शहर का निर्माण केवल सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के व्यवहार में बदलाव और सामूहिक जिम्मेदारी निभाने से ही संभव है।

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