Indore News : इंदौर, मध्यप्रदेश। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल के उस निर्णय को बरकरार रखा है, जिसके तहत स्कूल ने अनुशासनहीनता के कारण एक छात्र को $\text{10}$वीं कक्षा में प्रवेश देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति प्रणय वर्मा की एकल पीठ ने याचिका क्रमांक में विस्तृत आदेश पारित करते हुए, स्कूल के पक्ष में फैसला सुनाया और याचिकाकर्ता की याचिका को खारिज कर दिया।
READ MORE : Gwalior News : घर में फायरिंग कर गर्भवती महिला का किया अपहरण, पुलिस ने 24 घंटे में छुड़ाया….
Indore News : सोशल मीडिया पर अपमानजनक पोस्ट का मामला
यह पूरा मामला छात्र की गंभीर अनुशासनहीनता से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के पुत्र पर आरोप था कि उसने सोशल मीडिया पर स्कूल और शिक्षकों के विरुद्ध अपमानजनक और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने वाले मीम्स पोस्ट किए थे।
स्कूल की अनुशासन समिति की जांच में छात्र ने अपनी गलती स्वीकार भी कर ली थी, जिसके बाद स्कूल प्रबंधन ने उसे आगे पढ़ने की अनुमति न देने का निर्णय लिया।
बाल अधिकार आयोग का आदेश बाध्यकारी नहीं
याचिकाकर्ता ने राज्य बाल अधिकार आयोग के एक आदेश के आधार पर स्कूल के निर्णय को उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी। हालांकि, न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बाल अधिकार आयोग के आदेश केवल सलाहकारी प्रकृति के होते हैं, बाध्यकारी नहीं।
लिटिल वंडर्स कॉन्वेंट स्कूल की ओर से अधिवक्ता तरंग चेलावत ने पक्ष रखा। न्यायालय ने यह स्पष्ट रूप से माना कि विद्यालय को अनुशासन बनाए रखने के लिए ऐसे निर्णय लेने का पूर्ण अधिकार है। न्यायालय ने स्कूल के रुख को न तो अवैध माना और न ही मनमाना, जिसके बाद स्कूल का फैसला बरकरार रहा। यह फैसला शिक्षा संस्थानों में अनुशासन के महत्व को रेखांकित करता है।











