Indore Funeral: इंदौर। जैसलमेर में हुए सड़क हादसे में जान गंवाने वाले भारतीय सेना के अधिकारी मेजर हमजा आरिफ को सोमवार को इंदौर में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम संस्कार के दौरान कई ऐसे भावुक दृश्य सामने आए, जिन्होंने वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं। सबसे मार्मिक पल तब आया, जब पत्नी ज्योति अरोरा ने कांपते हाथों से अपने पति को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की। वह अपने जज्बातों पर काबू नहीं रख सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। इस कठिन घड़ी में उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर संभाला। वहीं, गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सेना द्वारा तिरंगा सौंपे जाने का दृश्य पूरे माहौल को गम और गर्व से भर गया।
सैन्य सम्मान के साथ निकली अंतिम यात्रा
मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर पूरे सम्मान के साथ अंतिम यात्रा के रूप में इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा। यहां भारतीय सेना के जवानों ने अपने साथी अधिकारी को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम सलामी दी। सैन्य सम्मान के बाद धार्मिक परंपराओं के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
अंतिम यात्रा में राजस्थान और मध्य प्रदेश से सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें कर्नल, लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर और अन्य सैन्य अधिकारी शामिल थे, मौजूद रहे। बड़ी संख्या में बोहरा समाज के लोग, शहरवासी, रिश्तेदार और मित्र भी अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने पहुंचे। पूरे वातावरण में शोक के साथ-साथ देश सेवा पर गर्व की भावना साफ दिखाई दे रही थी।
पत्नी की अंतिम श्रद्धांजलि ने हर किसी को रुला दिया
अंतिम संस्कार के दौरान सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला, जब पत्नी ज्योति अरोरा अपने पति के पार्थिव शरीर के सामने पहुंचीं। उन्होंने कांपते हाथों से अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की, लेकिन कुछ ही क्षणों में उनका दर्द आंसुओं के रूप में छलक पड़ा। वह खुद को संभाल नहीं सकीं और फूट-फूटकर रोने लगीं। वहां मौजूद हर व्यक्ति इस दृश्य को देखकर भावुक हो गया। उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर ढांढस बंधाया और मुश्किल समय में सहारा दिया।
तिरंगा सौंपते ही गम और गर्व का अद्भुत संगम
Indore Funeral: गार्ड ऑफ ऑनर की औपचारिकता पूरी होने के बाद भारतीय सेना के अधिकारियों ने वह राष्ट्रीय ध्वज (तिरंगा) पत्नी ज्योति अरोरा को सौंपा, जिसमें लिपटकर मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर इंदौर लाया गया था। तिरंगे को सीने से लगाकर खड़ी पत्नी की आंखों में पति को खोने का अथाह दुख था, लेकिन उसी तिरंगे ने उनके चेहरे पर एक सैनिक की पत्नी होने का गर्व भी साफ झलकाया। यह पल अंतिम विदाई का सबसे भावुक और यादगार क्षण बन गया।
सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते थे मेजर हमजा आरिफ
Indore Funeral: मेजर हमजा आरिफ को जानने वाले लोग बताते हैं कि वे बेहद सरल, मिलनसार, अनुशासित और अपने कर्तव्य के प्रति पूरी तरह समर्पित अधिकारी थे। उन्होंने अपने सैन्य जीवन में हर जिम्मेदारी को पूरी ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाया। उनकी असमय मृत्यु से परिवार ही नहीं, बल्कि सेना के साथियों, मित्रों और पूरे इंदौर शहर में शोक की लहर है।
हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे मेजर हमजा आरिफ
मेजर हमजा आरिफ भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी देशभक्ति, अनुशासन, कर्तव्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का जज्बा हमेशा लोगों के दिलों में जीवित रहेगा। इंदौर ने आज अपने इस वीर सपूत को अश्रुपूर्ण विदाई दी। अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि मेजर हमजा आरिफ केवल अपने परिवार के नहीं, बल्कि पूरे समाज और देश के लिए गर्व का प्रतीक थे। उनके जाने से जो शून्य पैदा हुआ है, उसे भर पाना आसान नहीं होगा, लेकिन उनका जीवन और सेवा आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।




