भोपाल : मध्य प्रदेश के आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा के विवादित बयान ने प्रदेश की राजनीति और अफसरशाही में तीखी बहस छेड़ दी है। इंदौर की एक स्थानीय अदालत ने इस बयान को लेकर दायर शिकायत पर संज्ञान लेते हुए तुकोगंज थाना प्रभारी को 20 जनवरी तक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत उसी दिन मामले की अगली सुनवाई भी करेगी।
यह शिकायत इंदौर के अधिवक्ता शैलेन्द्र द्विवेदी ने दर्ज कराई है, जिनका आरोप है कि आईएएस वर्मा ने एक कार्यक्रम में ब्राह्मण समाज की बेटियों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की, जिससे सामाजिक माहौल खराब हो सकता है। अधिवक्ता का कहना है कि उन्होंने पहले तुकोगंज थाने में शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई। इसके बाद मजबूरन अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
आईएएस अधिकारी पर बढ़ता दबाव
मामला गरमाने के बाद मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने 26 नवंबर को आईएएस संतोष वर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। विभाग ने उनसे पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों में उन्होंने वह बयान दिया, और क्यों न उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाए।
अधिकारी की सफाई—‘बयान को तोड़ा-मरोड़ा गया’
विवाद बढ़ने पर आईएएस वर्मा ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने किसी भी समुदाय का अपमान नहीं किया। उनका दावा है कि उनके वक्तव्य को संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि “यदि किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं खेद व्यक्त करता हूं।”उधर, सोशल मीडिया पर कार्यक्रम का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें उन पर ब्राह्मण समुदाय को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप लगाए जा रहे हैं।
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अजाक्स अधिवेशन से शुरू हुआ विवाद
विवाद की जड़ वह अधिवेशन है, जो 23 नवंबर को अजा-जजा कर्मचारी संघ (AJAKS) के प्रांतीय सम्मेलन में आयोजित हुआ था। इस दौरान वर्मा ने कथित तौर पर कहा—“जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी न दे दे, तब तक आरक्षण बना रहना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि आर्थिक आधार पर आरक्षण का तर्क तभी स्वीकार्य है जब समाज में ‘रोटी-बेटी का व्यवहार’ समान रूप से स्थापित हो।
राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज
इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है। कई सामाजिक संगठन कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं प्रशासनिक हलकों में यह मामला बड़ी अनुशासनात्मक चुनौती बन गया है।











