निशानेबाज न्यूज़ डेस्क : ईरान द्वारा होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद किए जाने के बाद वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माने जाने वाले इस जलडमरूमध्य पर बढ़ते तनाव ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में चिंता बढ़ा दी है।
इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान की नौसेना और वायुसेना को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने कई देशों से होर्मुज़ स्ट्रेट को खुला और सुरक्षित रखने के लिए सैन्य सहयोग की अपील की है।
सात देशों से चल रही बातचीत
रविवार को ट्रंप ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट की सुरक्षा को लेकर उनकी सात देशों से बातचीत चल रही है। इससे पहले उन्होंने चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और अन्य देशों से युद्धपोत भेजने की अपील की थी।
ट्रंप का कहना है कि यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इसे सुरक्षित बनाए रखने की जिम्मेदारी कई देशों को मिलकर उठानी चाहिए।
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अमेरिका को कम, चीन को ज्यादा जरूरत
ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अमेरिका को इस मार्ग से बहुत कम तेल मिलता है, जबकि चीन जैसे देशों की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।उन्होंने कहा कि अमेरिका ने लंबे समय तक इस मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित की है, लेकिन अब अन्य देशों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए।
कई देशों ने नहीं दिया सैन्य सहयोग
हालांकि ट्रंप का दावा है कि कई देशों से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक किसी भी देश ने सैन्य सहयोग के लिए स्पष्ट सहमति नहीं दी है।ऑस्ट्रेलिया ने साफ कहा है कि वह ट्रंप की अपील के बावजूद होर्मुज़ स्ट्रेट में अपनी नौसेना का जहाज नहीं भेजेगा। वहीं मध्य पूर्व के कई देशों ने भी इस मुद्दे पर सावधानीपूर्ण रुख अपनाया है।
NATO देशों से भी की अपील
ट्रंप ने NATO देशों से भी इस मिशन में सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे अमेरिका NATO और यूक्रेन की मदद करता रहा है, वैसे ही इस मिशन में भी सहयोग मिलना चाहिए।
उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के पास अब बहुत कम मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं और अमेरिका ने उनके नए हथियार विकसित करने की क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है।
ईरान पर हमलों का दावा
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई महत्वपूर्ण ठिकानों पर हमले किए हैं। उन्होंने खर्ग द्वीप का भी जिक्र किया, जिसे ईरान का प्रमुख तेल भंडारण केंद्र माना जाता है।
ट्रंप के मुताबिक अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं दिख रहा, लेकिन भविष्य में वार्ता की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।











