Sunday, October 4, 2026
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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई : जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग सिफारिश पर बहस तेज़

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सुप्रीम कोर्ट : नई दिल्ली: जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को फिर से सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान वकील कपिल सिब्बल ने अदालत में जस्टिस वर्मा का पक्ष रखते हुए आंतरिक समिति की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए, तो वहीं सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने भी तीखे शब्दों में जवाब दिया।

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कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्च न्यायालय या सुप्रीम कोर्ट के किसी जज के खिलाफ आंतरिक जांच रिपोर्ट के आधार पर महाभियोग सिफारिश का कोई वैधानिक प्रावधान नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने किस आधार पर तीन जजों की समिति गठित की और फिर उसकी रिपोर्ट के आधार पर प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को कार्रवाई की सिफारिश भेजी?

सिब्बल की दलीलों पर सुप्रीम कोर्ट की बेंच—जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह—ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। बेंच ने कहा:

“चीफ जस्टिस कोई पोस्ट ऑफिस नहीं होते। उनके पास अगर कोई गंभीर रिपोर्ट है तो वह उसे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को बता सकते हैं। 1999 से ‘इन हाउस’ जांच की प्रक्रिया मान्य है।”

जब सिब्बल ने आरोप लगाया कि न्यायालय का मन पहले से बना हुआ है, तो बेंच ने उन्हें दलीलें पूरी करने की छूट देते हुए कहा:

“हम इसलिए बोल रहे हैं ताकि चीजें स्पष्ट हों, वरना हम चुप रह सकते थे। लेकिन मौन रहना न्याय नहीं होगा।”

महाभियोग की प्रक्रिया पर आपत्ति

कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि इस तरह की रिपोर्टों के आधार पर यदि किसी जज के खिलाफ महाभियोग की सिफारिश की जाती है, तो यह खतरनाक मिसाल बन सकती है। उन्होंने कमेटी की वैधानिकता पर भी सवाल उठाए।

बेंच ने सिब्बल को स्पष्ट किया कि वह इस बहस को रिपोर्ट की गुणवत्ता से न जोड़ें, बल्कि यह बताएं कि क्या वह कमेटी को असंवैधानिक मानते हैं या नहीं।

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इस पूरे मामले में जांच समिति को अवैध घोषित करने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल फैसला सुरक्षित रख लिया है। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार की शक्तियों पर कोई टिप्पणी नहीं की जा रही है, बल्कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की प्रक्रिया पर ही चर्चा हो रही है।

जस्टिस यशवंत वर्मा का नाम उस कथित कैश स्कैम से जुड़ा है, जिसमें तीन जजों की आंतरिक समिति ने उन्हें दोषी पाया था। रिपोर्ट के आधार पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को उनके खिलाफ महाभियोग चलाने की सिफारिश की थी।

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