नई दिल्ली। Nishaanebaz.com-Painkiller Kidney Damage Health Warning: सिरदर्द, पीठ दर्द, कमर दर्द या घुटनों के दर्द से राहत पाने के लिए मेडिकल स्टोर से जाकर तुरंत पेन किलर (दर्द निवारक दवा) खरीदकर खाने की आदत आपकी किडनी को हमेशा के लिए तबाही की ओर धकेल रही है। दिल्ली के प्रमुख अस्पतालों के वरिष्ठ नेफ्रोलॉजिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टर की परामर्श के लंबे समय तक पेन किलर लेने से किडनी की कार्यक्षमता तेजी से घट रही है। कई मामलों में स्थिति इतनी बिगड़ जाती है कि मरीजों की किडनी पूरी तरह फेल हो जाती है और उन्हें जिंदा रहने के लिए नियमित डायलिसिस का सहारा लेना पड़ रहा है।
दिल्ली के प्रसिद्ध सर गंगाराम अस्पताल के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. वैभव तिवारी के अनुसार, उनकी ओपीडी में हर हफ्ते ऐसे कई मरीज पहुंच रहे हैं, जिनकी किडनी पेन किलर के अत्यधिक इस्तेमाल से खराब हुई है। चिंताजनक बात यह है कि यह समस्या अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि 30 से 40 वर्ष की कम उम्र वाले युवाओं में भी देखी जा रही है। लोग सालों-साल घुटने, सिर या पीठ दर्द के लिए डॉक्टर से इलाज कराने के बजाय खुद ही पेन किलर खाते रहते हैं।
डॉ. वैभव ने बताया कि शुरुआत में पेन किलर का किडनी पर हो रहा जहरीला असर पता नहीं चलता, क्योंकि इसके लक्षण काफी समय बाद सामने आते हैं। दवाइयों के असर से शरीर में प्रोटीन और क्रिएटिनिन का संतुलन बिगड़ने लगता है। जब मरीज को यूरिन (पेशाब) करने में गंभीर परेशानी, पीठ के निचले हिस्से में लगातार दर्द और पैरों व टखनों के आसपास सूजन की समस्या होती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
वहीं, दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. राजेश अग्रवाल ने खुलासा किया कि उनके पास हर महीने 10 से 15 ऐसे मरीज आते हैं जिनकी किडनी पेन किलर लेने से बुरी तरह प्रभावित हुई होती है। उन्होंने कहा कि लोगों को लगता है कि दर्द में तुरंत आराम मिलने के कारण यह दवा सामान्य और सुरक्षित है, लेकिन इसका अनियंत्रित और अत्यधिक सेवन अचानक किडनी फेलियर (Acute Kidney Injury) का कारण बन सकता है।
आखिर पेन किलर से कैसे खराब होती है किडनी?
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ब्लड फ्लो में कमी: अत्यधिक मात्रा में पेन किलर खाने से किडनी तक होने वाला रक्त प्रवाह (Blood Flow) काफी घट जाता है।
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प्रोस्टाग्लैंडिन्स केमिकल ब्लॉकेज: हमारे शरीर में ‘प्रोस्टाग्लैंडिन्स’ नामक रसायन होता है, जो किडनी की रक्त वाहिकाओं को फैलाकर रखता है ताकि खून का सही बहाव बना रहे।
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नसों का सिकुड़ना: पेन किलर दवाएं इस रसायन को बनने से रोक देती हैं, जिससे नसें सिकुड़ जाती हैं और किडनी तक पर्याप्त खून नहीं पहुंच पाता।
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फिल्टरेशन यूनिट्स का नष्ट होना: खून की सप्लाई रुकने से किडनी के नेफ्रॉन्स (फिल्टर यूनिट्स) धीरे-धीरे डेड होने लगते हैं।
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विशेषज्ञों का कहना है कि महीने में कभी-कभार एक-दो बार दर्द निवारक दवा लेने से बड़ा नुकसान नहीं होता, लेकिन इसे आदत बना लेना जानलेवा है। यदि शरीर के किसी भी हिस्से में लगातार दर्द बना रहता है, तो खुद से मेडिकल स्टोर से दवाएं न खरीदें। तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क कर बीमारी की सही वजह का इलाज कराएं ताकि किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग को सुरक्षित रखा जा सके।






