[nishaanebaz.com] Rewa News: रीवा। संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस मामले को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि रीवा के संजय गांधी अस्पताल में हुई घटना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब तक मृतका कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे को न्याय नहीं मिलता, कांग्रेस इस मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने यह भी कहा कि आज से रीवा में कांग्रेस पार्टी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी।
कल्पना मिश्रा और नवजात की मौत से गरमाया मामला
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद से ही परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं। परिवार की ओर से इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।
मामले को लेकर कल्पना मिश्रा के पिता रामशिरोमणि मिश्रा भी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उनका आमरण अनशन रविवार को पांचवें दिन भी जारी रहा। वे सिरमौर चौराहा पर धरने पर बैठे हैं और बेटी तथा उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं।
दिग्विजय सिंह बोले- डिप्टी CM को इस्तीफा देना चाहिए
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय सिंह ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संजय गांधी अस्पताल में हुई घटना स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।दिग्विजय सिंह ने कहा कि इस घटना के चलते वे उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था खराब स्थिति में पहुंच गई है और सरकार को इसकी जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।उन्होंने यह भी कहा कि कल्पना मिश्रा को न्याय मिलने तक कांग्रेस आंदोलन जारी रखेगी।
आज से रीवा में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
दिग्विजय सिंह ने ऐलान किया कि मामले को लेकर आज से रीवा में कांग्रेस पार्टी विरोध प्रदर्शन शुरू करेगी। कांग्रेस का कहना है कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।पार्टी नेताओं का कहना है कि सिर्फ निलंबन की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। परिजनों की ओर से भी एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग लगातार उठाई जा रही है।
पिता का आमरण अनशन पांचवें दिन भी जारी
कल्पना मिश्रा के पिता रामशिरोमणि मिश्रा बेटी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे हैं। रविवार को उनके अनशन का पांचवां दिन था।परिजनों की प्रमुख मांग है कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
चार डॉक्टर-कर्मचारियों पर निलंबन की कार्रवाई
मामले में अब तक दो नर्सिंग अधिकारियों और दो डॉक्टरों को निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ड्यूटी डॉक्टर सोनल अग्रवाल तथा स्त्री रोग विशेषज्ञ/एनेस्थीसियोलॉजिस्ट डॉ. निधि पांडे को निलंबित किया गया है। इसके अलावा दो नर्सिंग अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
मामले की जांच के लिए अलग-अलग कमेटियों का गठन किया गया है। जांच में यह देखा जा रहा है कि कल्पना के अस्पताल में भर्ती होने से लेकर उसकी मौत तक इलाज की पूरी प्रक्रिया क्या रही और उपचार के दौरान किन स्तरों पर चूक हुई।
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पहले भी राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग कर चुके हैं दिग्विजय सिंह
यह पहली बार नहीं है जब दिग्विजय सिंह ने राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की है। इससे पहले अक्टूबर 2025 में जहरीले कफ सिरप से बच्चों की मौत के मामले को लेकर भी उन्होंने तत्कालीन स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार पर सवाल उठाते हुए उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की मांग की थी।अब कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले ने एक बार फिर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही को लेकर सियासी बहस तेज कर दी है।
जांच रिपोर्ट से सामने आएगी जिम्मेदारी
फिलहाल अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन की ओर से मामले की जांच की जा रही है। चार डॉक्टर-कर्मचारियों के निलंबन के बाद अब जांच समितियों की रिपोर्ट का इंतजार है।वहीं, परिवार का आंदोलन और कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन आगे क्या रूप लेता है, इस पर भी नजर बनी हुई है। एक ओर परिजन न्याय और एफआईआर की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर कांग्रेस ने मामले को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। अब जांच के निष्कर्षों से ही यह स्पष्ट होगा कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले में वास्तविक रूप से जिम्मेदारी किसकी बनती है।






