Health crisis : भूपेन्द्र भदौरिया, ग्वालियर। ग्वालियर शहर में दीपावली पर चलाई गई आतिशबाजी ने इस बार प्रदूषण बढ़ाने के साथ-साथ एक गंभीर स्वास्थ्य संकट भी खड़ा कर दिया है। सबसे बड़ा कहर सस्ती कैल्शियम कार्बाइड गन के रूप में सामने आया है, जिसके विस्फोट से कई युवाओं की आँखें बुरी तरह जख्मी हो गई हैं। पिछले दो से तीन दिनों के भीतर ग्वालियर जिले में कार्बाइड गन से घायल हुए लगभग 17 से अधिक युवा विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचे हैं। विशेषज्ञों ने इस गन के कंटेंट को अत्यधिक घातक बताया है, जो सीधे आँखों के सबसे संवेदनशील हिस्से, कॉर्निया को क्षति पहुंचाता है।
इस खतरनाक गन का शिकार हुए कई युवाओं की आँखों को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। बुधवार को भिंड जिले के गोहद निवासी दो युवक सतेन्द्र गुर्जर और सूरज गुर्जर, जो ग्वालियर के डीडी नगर में कार्बाइड गन चला रहे थे, घायल हो गए। दोनों की आँख का कॉर्निया बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिससे उनकी दृष्टि पर खतरा मंडरा रहा है। घायलों में से एक, सतेन्द्र की हालत अत्यंत गंभीर होने पर उसे तत्काल भोपाल एम्स रेफर किया गया है, जहाँ उसका इलाज जारी है। कई पीड़ितों की आँख का कॉर्निया सफेद हो गया है, जो विजन के लिए बड़ा खतरा है।
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Health crisis : आठ घायलों का हुआ ऑपरेशन, सफलता पर संदेह
कार्बाइड गन से घायल हुए युवाओं को शहर के प्रमुख अस्पतालों, जिनमें जिला अस्पताल मुरार, जेएएच (जयारोग्य अस्पताल) और निजी अस्पताल रतन ज्योति नेत्रालय शामिल हैं, में भर्ती कराया गया है। अकेले जेएएच में अब तक आठ लोग शिकार होकर पहुँच चुके हैं। विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कुल आठ घायलों का ऑपरेशन किया जा चुका है। हालांकि, डॉक्टर्स का कहना है कि ऑपरेशन कितना सफल रहा और रोशनी कितनी हद तक लौट पाएगी, यह अभी कह पाना मुश्किल है। यह अनिश्चितता घायलों और उनके परिजनों की चिंता को बढ़ा रही है।
जिला अस्पताल मुरार के नेत्र रोग विभाग में भर्ती एक पीड़ित, ओम ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वह आतिशबाजी चला रहा था, तभी कार्बाइड वाला पटाखा चलाते ही फट गया। इससे उसकी एक आँख में गंभीर चोट लगी और उसे दिखना बंद हो गया। ओम ने बताया कि अभी भी उसे धुंधला धुंधला दिखाई दे रहा है। उसके जैसे कई अन्य केस जिला अस्पताल के नेत्र रोग विभाग में आए हैं। इन सभी पीड़ितों की विजन को कालान्तर में स्थायी नुकसान होने की आशंका है, जिसकी डॉक्टर्स निगरानी कर रहे हैं।
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जयारोग्य अस्पताल समूह के नेत्र रोग विशेषज्ञ और एचओडी, डॉ. दिनेश शाक्य ने इस विषय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। डॉ. शाक्य ने बताया कि जेएएच में कार्बाइड गन से शिकार हुए मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, और अनेक मरीज निजी अस्पतालों में भी उपचार करवा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस गन का कंटेंट काफी घातक है, जो सीधे कॉर्निया को क्षति पहुंचाता है। डॉ. शाक्य ने चेतावनी देते हुए कहा कि इस खतरनाक गन के निर्माण और बिक्री पर तत्काल रोक लगनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे हादसे न हों।













