मऊगंज : मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले की हनुमना तहसील से प्रशासनिक लापरवाही और कथित भ्रष्टाचार का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक ऐसे बुजुर्ग के नाम पर जमीन का नामांतरण कर दिया गया, जिनकी मौत चार महीने पहले ही हो चुकी थी। सरकारी कागजों में मृतक न सिर्फ जिंदा पाया गया, बल्कि उसने फाइल पर सहमति देते हुए हस्ताक्षर भी कर दिए।
चार महीने पहले हो चुकी थी मौत
मामला ग्राम जड़कुड़ का है। 79 वर्षीय रामलाल यादव का निधन 21 अगस्त 2025 को हो चुका था। परिवार ने विधिवत अंतिम संस्कार किया और मृत्यु प्रमाण पत्र भी मौजूद है। इसके बावजूद तहसील रिकॉर्ड में रामलाल यादव को जीवित दर्शाया गया।
मृतक ने किया सहमति जवाब-दावा!
रिकॉर्ड के अनुसार, 4 नवंबर 2025 को रामलाल यादव खुद तहसील पहुंचे और जमीन नामांतरण के लिए सहमति जवाब-दावा दाखिल किया। हैरानी की बात यह है कि जो व्यक्ति जीवन भर अनपढ़ रहा और केवल अंगूठा लगाता था, उसने दस्तावेजों पर स्पष्ट हस्ताक्षर किए हैं।
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SDM के आदेश को किया नजरअंदाज
मामला तब और गंभीर हो गया जब यह सामने आया कि SDM हनुमना ने नामांतरण प्रक्रिया रोकने के निर्देश दिए थे, इसके बावजूद तहसीलदार ने 3 दिसंबर 2025 को आनन-फानन में नामांतरण का आदेश पारित कर दिया।
भू-माफिया और राजस्व अमले पर आरोप
पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह पूरा मामला भू-माफियाओं और राजस्व अमले की मिलीभगत का नतीजा है। उनका कहना है कि जमीन हड़पने के लिए मृतक को कागजों में जिंदा दिखाया गया।
सिस्टम की साख पर बड़ा सवाल
परिवार अब न्याय के लिए प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, जबकि यह मामला राजस्व व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हनुमना तहसील का यह “कागजी चमत्कार” पूरे सिस्टम की पोल खोलता नजर आ रहा है।











