नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से नए H-1B वीजा शुल्क में भारी वृद्धि की घोषणा अब उनके लिए सिरदर्द बन गई है। अमेरिकी व्यापार लॉबी यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स ने ट्रंप प्रशासन पर “गुमराह करने वाली और गैरकानूनी नीति” लागू करने का आरोप लगाते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।
कोलंबिया की जिला अदालत में दायर याचिका में कहा गया है कि ट्रंप सरकार का यह फैसला न केवल अमेरिकी प्रतिस्पर्धा को कमजोर करेगा, बल्कि कांग्रेस के अधिकार क्षेत्र का भी उल्लंघन करता है।
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ट्रंप प्रशासन ने सितंबर में एक आदेश जारी कर एच-1बी वीजा शुल्क को 3,600 डॉलर से बढ़ाकर 1 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 88 लाख रुपये) कर दिया था। यह फैसला खास तौर पर भारतीय पेशेवरों को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) के मुताबिक हाल के वर्षों में 71% एच-1बी वीजा भारतीयों को मिले हैं।
यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स के अधिकारी नील ब्रैडली ने कहा कि यह निर्णय अमेरिकी इनोवेशन और व्यवसायों के लिए “घातक झटका” साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि उच्च शुल्क छोटे और मझोले उद्यमों के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रतिभा तक पहुंच लगभग असंभव बना देगा।
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इसके अलावा, चैंबर ने चेतावनी दी कि इस नीति से अमेरिका की प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और भारत, चीन जैसे देशों को वैश्विक प्रतिभाओं को आकर्षित करने का लाभ मिलेगा। चीन ने हाल ही में K-Visa नामक नई वर्क वीजा योजना की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य युवा टेक और साइंस प्रोफेशनल्स को आकर्षित करना है।











