ग्वालियर: ग्वालियर खंडपीठ ने शिवपुरी के प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विवेक शर्मा के आचरण पर सवाल उठाते हुए आदेश दिया कि उनके खिलाफ विभागीय जांच की जाए। आरोपी की पांचवी जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई।
मामले का संक्षिप्त विवरण:
- आरोपी रूप सिंह परिहार, शिवपुरी के भूमि अधिग्रहण कार्यालय में कंप्यूटर ऑपरेटर, पर जमीन मुआवजे में हेराफेरी का आरोप।
- किसानों को मिलने वाले लगभग 6.55 लाख रुपये की जगह पैसे 8 अन्य लोगों में ट्रांसफर किए गए।
- आरोपी की पत्नी के खाते में 73 लाख से अधिक की राशि जमा हुई, कुल 5 करोड़ से अधिक सार्वजनिक धन का गबन।
- कलेक्टर कार्यालय के आदेशों में छेड़छाड़, फर्जी दस्तावेज तैयार करना और राजस्व अभिलेखों में आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश।
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हाईकोर्ट की नाराजगी:
- ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को लाभ पहुंचाने के लिए गंभीर धाराओं को हटाकर केवल धारा 406 लागू की।
- जस्टिस राजेश कुमार गुप्ता ने इसे ज्यूडिशियल प्रक्रिया और सार्वजनिक धन की सुरक्षा के खिलाफ बताया।
- आरोपी की जमानत खारिज करते हुए ज्यूडिशियल जांच के आदेश दिए।
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हाईकोर्ट का आदेश:
- प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अनिवार्य।
- आदेश की प्रति प्रिंसिपल रजिस्ट्रार (विजिलेंस) को भेजी गई, ताकि इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जा सके।
- जज के खिलाफ विभागीय जांच शुरू की जाएगी।
निष्कर्ष:
एमपी हाईकोर्ट ने इस मामले में स्पष्ट संदेश दिया कि सार्वजनिक धन के गबन और ज्यूडिशियल प्रक्रिया में अनियमितता को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।











