EV vs Petrol Car Fire Safety: जानें क्या कहते हैं आंकड़े, कौन सी कार है आग से ज्यादा सुरक्षित

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EV vs Petrol Car Fire Safety: नई दिल्ली। वैश्विक स्तर पर और भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार में पर्यावरण अनुकूल इलेक्ट्रिक वाहनों की लोकप्रियता और मांग बहुत ही तेजी के साथ लगातार बढ़ रही है। लेकिन इस तकनीकी बदलाव के साथ ही उपभोक्ताओं के मन में सुरक्षा को लेकर कुछ बेहद गंभीर सवाल भी अक्सर चर्चा का विषय बने रहते हैं। इन सभी आशंकाओं में सबसे बड़ा और संवेदनशील सवाल यह है कि क्या इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने का खतरा पारंपरिक पेट्रोल या डीजल कारों की तुलना में सचमुच ज्यादा होता है। अक्सर सोशल मीडिया और इंटरनेट पर इलेक्ट्रिक वाहनों में अचानक आग लगने की छिटपुट घटनाएं बहुत बड़ी सुर्खियां बन जाती हैं, जिससे आम लोगों के मन में एक अनजाना डर पैदा हो जाता है। हालांकि ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का साफ कहना है कि केवल कुछ चुनिंदा नकारात्मक घटनाओं के आधार पर पूरी तकनीक को कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है।Electric car fires have had the world on tenterhooks: now data shows  whether or not they are dangerous - Advanced Fleet English

वाहन विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी प्रकार के वाहन में आग लगने की अप्रिय संभावना कई अलग-अलग तकनीकी और बाहरी कारणों से हो सकती है।

क्या कहते हैं अंतरराष्ट्रीय आंकड़े, कौन सी कार है सुरक्षित

सामान्य जनधारणा के बिल्कुल विपरीत कई बड़े अंतरराष्ट्रीय शोधों और अध्ययनों में यह वैज्ञानिक रूप से पाया गया है कि पेट्रोल और डीजल वाहनों में आग लगने की घटनाएं इलेक्ट्रिक वाहनों की तुलना में कहीं अधिक होती हैं। इसका सबसे मुख्य कारण यह है कि पारंपरिक वाहनों में हर समय अत्यधिक ज्वलनशील तरल ईंधन मौजूद होता है जो जरा सी लापरवाही से भी आग पकड़ सकता है। दूसरी तरफ आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों में बेहद सुरक्षित बैटरी पैक और कई स्तर की सुरक्षा तकनीकें इनबिल्ट दी जाती हैं। आज की आधुनिक ईवी में लगा हुआ एडवांस्ड बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम यानी बीएमएस हर सेकंड बैटरी के आंतरिक तापमान, वोल्टेज और उसके प्रदर्शन पर बहुत ही बारीकी से नजर रखता है। यदि चार्जिंग या ड्राइविंग के दौरान कोई भी असामान्य स्थिति बनती है, तो यह सिस्टम तुरंत प्रतिक्रिया देकर बिजली की आपूर्ति को काट देता है।

यही वजह है कि अधिकांश मामलों में इलेक्ट्रिक वाहनों को सामान्य उपयोग के दौरान पारंपरिक ईंधन कारों से बहुत ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।Car Fire Statistics – Updated August 2025 | Honest John

आग लगने की स्थिति और प्रकृति में क्या है सबसे बड़ा फर्क

ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के अनुसार इलेक्ट्रिक और पेट्रोल कारों में आग लगने की मूल प्रकृति और उसके कारणों में बहुत बड़ा तकनीकी अंतर होता है। एक पेट्रोल या डीजल संचालित वाहन में आग लगने की घटना अक्सर ईंधन पाइप में रिसाव, इंजन के अत्यधिक गर्म होने या शॉर्ट सर्किट से जुड़ी समस्या के कारण अचानक हो सकती है। इसके विपरीत, किसी इलेक्ट्रिक वाहन में यदि कोई बाहरी दुर्घटना होती है और उसका मुख्य बैटरी पैक सीधे प्रभावित होता है, तभी आग लगने की स्थिति बनती है। हालांकि ईवी की बैटरी में लगी आग को नियंत्रित करना पारंपरिक आग की तुलना में अग्निशमन दल के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण और समय लेने वाला काम हो सकता है। यही मुख्य कारण है कि दुनिया भर की तमाम प्रतिष्ठित वाहन निर्माता कंपनियां इन दिनों बैटरी सुरक्षा को मजबूत करने पर अरबों डॉलर का लगातार निवेश कर रही हैं।

आज बाजार में आने वाली आधुनिक इलेक्ट्रिक कारों में बेहद मजबूत सुरक्षा कवच जैसी बैटरी हाउसिंग, थर्मल प्रोटेक्शन और कई सुरक्षा परतें दी जाती हैं।

गलत रखरखाव और चार्जिंग की आदतें भी बदलती हैं सुरक्षा का पैमाना

विशेषज्ञों का दृढ़ता से मानना है कि वाहन चाहे पारंपरिक पेट्रोल का हो या फिर आधुनिक इलेक्ट्रिक तकनीक का, सुरक्षा और सही रखरखाव के नियम दोनों के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों के सुरक्षित संचालन के लिए अधिकृत सर्विस सेंटर से नियमित रूप से तकनीकी जांच कराना और कंपनी द्वारा प्रमाणित चार्जर से ही सही आदतों के तहत चार्जिंग करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही वाहन मालिकों को स्थानीय स्तर पर बैटरी के साथ किसी भी प्रकार की अनधिकृत छेड़छाड़ या मोडिफिकेशन से पूरी तरह बचना चाहिए। कुल मिलाकर उपलब्ध वैश्विक आंकड़े और वैज्ञानिक तथ्य यही बताते हैं कि ईवी में आग लगने का खतरा उतना अधिक बिल्कुल नहीं है जितना आमतौर पर भ्रामक प्रचार के जरिए माना जाता है। इसलिए उपभोक्ताओं को किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले वास्तविक जानकारी को समझना चाहिए।

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