Rewa ED Raid: रीवा। मध्यप्रदेश के रीवा जिले में आर्थिक अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों की जांच लगातार गहराती जा रही है। आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग (EOW) द्वारा 44 संविदाकारों के खिलाफ दर्ज मामलों के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शुक्रवार तड़के रीवा के चर्चित ठेकेदार एवं संविदाकार यूनियन से जुड़े पदाधिकारी कृष्णकांत सोहगौरा उर्फ के.के. सोहगौरा के निवास पर ईडी की टीम ने दबिश देकर जांच शुरू की, जिसके बाद पूरे ठेकेदार जगत में हड़कंप मच गया।
Rewa ED Raid: सूत्रों के अनुसार, सुबह-सुबह रीवा के ढेकहा चौराहा स्थित आवास पर पहुंची प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच घर के भीतर मौजूद दस्तावेजों, वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों और ठेकेदारी कार्यों से जुड़े रिकॉर्ड की बारीकी से जांच शुरू की। कार्रवाई की खबर फैलते ही क्षेत्र में लोगों की भीड़ जुटने लगी और मामला पूरे शहर में चर्चा का विषय बन गया।
EOW की जांच के बाद बढ़ी ED की सक्रियता
Rewa ED Raid: गौरतलब है कि कुछ समय पहले आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग ने रीवा संभाग के 44 संविदाकारों के खिलाफ आर्थिक अनियमितताओं और कथित भ्रष्टाचार के मामलों में अपराध दर्ज किया था। इसी मामले में लगातार जांच चल रही है। माना जा रहा है कि ईडी की कार्रवाई भी उन्हीं मामलों से जुड़े वित्तीय पहलुओं की जांच का हिस्सा है।
Rewa ED Raid: सूत्र बताते हैं कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि ठेकेदारी कार्यों में प्राप्त राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया, क्या कहीं अवैध वित्तीय लेन-देन हुआ और क्या किसी प्रकार से धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के संकेत मौजूद हैं। इसी कारण कई संविदाकारों और क्रेशर कारोबारियों की गतिविधियां भी जांच एजेंसियों के रडार पर बताई जा रही हैं।
कार्रवाई के दौरान हुआ विवाद, अधिकारियों की पहचान पर उठाए सवाल
Rewa ED Raid: प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कार्रवाई के दौरान ईडी अधिकारियों ने संविदाकार को सुरक्षा घेरे में रखा था। इसी बीच कृष्णकांत सोहगौरा कथित रूप से सुरक्षा घेरे से बाहर निकल आए और कार्रवाई कर रही टीम की पहचान तथा अधिकारिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने लगे। कुछ समय के लिए मौके पर बहस और हंगामे जैसी स्थिति भी बनी रही।
Rewa ED Raid: हालांकि अधिकारियों ने अपनी कार्रवाई जारी रखी और घर में मौजूद दस्तावेजों की जांच करते रहे। इस घटनाक्रम के बाद इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी चर्चा तेज
Rewa ED Raid: कृष्णकांत सोहगौरा का नाम रीवा संभाग के प्रभावशाली ठेकेदारों में शामिल माना जाता है। वे भाजपा नेता प्रदीप सोहगौरा के भाई बताए जाते हैं। यही कारण है कि ईडी की कार्रवाई के बाद राजनीतिक गलियारों में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Rewa ED Raid: स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी चल रही है कि बड़े निर्माण कार्यों और सरकारी ठेकों में कथित अनियमितताओं को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा अभी तक नहीं की गई है और जांच जारी है।
पहले EOW के खिलाफ भी किया था विरोध
Rewa ED Raid: जानकारी के अनुसार, जब आर्थिक अपराध अन्वेषण विभाग ने 44 संविदाकारों के खिलाफ मामला दर्ज किया था, तब कृष्णकांत सोहगौरा ने अन्य ठेकेदारों को एकजुट कर कार्रवाई का विरोध किया था। उस दौरान उन्होंने संबंधित जांच अधिकारियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने और जांच की मांग को लेकर वरिष्ठ नेताओं को ज्ञापन भी सौंपा था।
Rewa ED Raid: अब उन्हीं के यहां ईडी की कार्रवाई होने के बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया है।
दस्तावेजों की गहन जांच जारी
Rewa ED Raid: सूत्रों का कहना है कि ईडी की टीम वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, बैंक खातों और ठेकेदारी कार्यों के भुगतान संबंधी रिकॉर्ड का परीक्षण कर रही है। जांच एजेंसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
Rewa ED Raid: फिलहाल रीवा में हुई इस कार्रवाई के बाद ठेकेदारों, कारोबारियों और प्रशासनिक हलकों में हलचल का माहौल है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में आगे क्या खुलासे होते हैं और एजेंसियां किन नए तथ्यों तक पहुंचती हैं।









