Diabetes Shoulder: हेल्थ न्यूज़ अपडेट: कंधे में दर्द और जकड़न को न करें नजरअंदाज, हो सकती है यह गंभीर बीमारी

0
145

Diabetes Shoulder: रायपुर। देश और दुनिया में पैर पसार रही डायबिटीज की बीमारी सिर्फ रक्त में शर्करा की मात्रा ही नहीं बढ़ाती है बल्कि यह शरीर के अन्य अंगों को भी गंभीर रूप से प्रभावित करती है। यदि आपको भी मधुमेह की शिकायत है और पिछले कुछ समय से आपके कंधे में लगातार दर्द, जकड़न या हाथ को ऊपर-नीचे घुमाने में परेशानी महसूस हो रही है, तो आपको इसे बिल्कुल भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज से जुड़ी एक ऐसी गंभीर शारीरिक समस्या भी है जिसके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी होती है, लेकिन यह मरीजों के बीच काफी आम है। इस स्थिति को आम बोलचाल की भाषा में अक्सर डायबिटीज शोल्डर कहा जाता है, जबकि चिकित्सा विज्ञान की भाषा यानी मेडिकल टर्म में इसे फ्रोजन शोल्डर के नाम से जाना जाता है। यह एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जो धीरे-धीरे मरीज के कंधे की सामान्य गतिविधियों को पूरी तरह से सीमित कर सकती है और उनके रोजमर्रा के आसान कामों को भी बेहद मुश्किल बना देती है।

इस स्वास्थ्य समस्या के संबंध में जर्नल ऑफ डायबिटीज इन्वेस्टिगेशन में प्रकाशित एक हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।Frozen Shoulder Treatment Therapies Nagpur Dr Vishal Sahni

सामान्य मरीजों के मुकाबले पांच गुना अधिक खतरा

चिकित्सा शोधकर्ताओं ने अपने इस अध्ययन में पाया कि डायबिटीज की बीमारी से पीड़ित लोगों में कंधे से संबंधित विभिन्न समस्याओं की दर लगभग 27.5 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसके विपरीत अगर हम सामान्य यानी बिना डायबिटीज वाले मरीजों की बात करें, तो उनमें यह आंकड़ा केवल 5 प्रतिशत के आसपास ही देखा गया है। शोध का यह बड़ा अंतर साफ तौर पर दर्शाता है कि अनियंत्रित डायबिटीज और फ्रोजन शोल्डर की बीमारी के बीच एक बहुत ही गहरा और सीधा संबंध है। चिकित्सा विज्ञान के अनुसार फ्रोजन शोल्डर असल में एक ऐसी शारीरिक स्थिति है जिसमें कंधे के जोड़ के चारों तरफ मौजूद कनेक्टिव टिश्यू अचानक मोटे और काफी कड़े हो जाते हैं। इसके परिणामस्वरूप कंधे को सामान्य रूप से हिलाना-डुलाना या हाथ को पीछे ले जाना बेहद दर्दनाक और मुश्किल होने लगता है।

इस बीमारी की शुरुआत में मरीज को केवल हल्का दर्द महसूस होता है, लेकिन समय बीतने के साथ कंधे का मूवमेंट पूरी तरह से लॉक हो जाता है।

उच्च रक्त शर्करा से प्रभावित होता है कोलेजन प्रोटीन

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक शरीर में ब्लड शुगर का स्तर अधिक बने रहने के कारण हमारे आंतरिक टिश्यू की संरचना में कई अवांछित बदलाव आने लगते हैं। रक्त में मौजूद अतिरिक्त ग्लूकोज सीधे तौर पर शरीर के कोलेजन नामक महत्वपूर्ण प्रोटीन को प्रभावित करता है, जिसके कारण कंधे के आसपास के टिश्यू अपनी प्राकृतिक लचक खो देते हैं। यही मुख्य जैविक प्रक्रिया कंधे के जोड़ को पूरी तरह से जकड़ देती है और वहां स्थायी रूप से कड़ापन आ जाता है। इसके अलावा शरीर में लगातार बनी रहने वाली अंदरूनी सूजन और कंधे के नाजुक टिश्यू तक रक्त का प्रवाह कम होना भी इस दर्दनाक समस्या को बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

चिकित्सकों के मुताबिक यह पूरी समस्या आमतौर पर तीन अलग-अलग क्रमिक चरणों में विकसित होती है, जिसे समझना बेहद जरूरी है।Diabetic Shoulder Pain Treatment: Types of Treatment Options

तीन चरणों में बढ़ती है फ्रोजन शोल्डर की समस्या

इस बीमारी का पहला चरण फ्रीजिंग स्टेज कहलाता है, जिसमें कंधे का दर्द धीरे-धीरे बढ़ता है और हाथ की मूवमेंट कम होने लगती है। इसके बाद बीमारी का दूसरा चरण यानी फ्रोजन स्टेज आता है, जहां दर्द में तो कुछ हद तक कमी महसूस हो सकती है, लेकिन कंधे की जकड़न पहले से कहीं अधिक मजबूत हो जाती है। अंततः इस समस्या का तीसरा और अंतिम चरण थॉइंग स्टेज होता है, जिसमें बहुत लंबे समय के बाद धीरे-धीरे कंधे की गतिशीलता वापस आने लगती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रोजन शोल्डर के ठीक होने की यह पूरी प्राकृतिक प्रक्रिया कई महीनों से लेकर दो साल तक का लंबा समय ले सकती है।

डॉक्टर आमतौर पर मरीज की पुरानी मेडिकल हिस्ट्री, खासकर उनके डायबिटीज के स्तर की जानकारी, शारीरिक जांच और जरूरत पड़ने पर एक्स-रे या एमआरआई जैसे आधुनिक इमेजिंग टेस्ट की मदद से इस समस्या का सटीक निदान करते हैं।Diabetes Linked to Rising Cases of Frozen Shoulder and Other  Musculoskeletal Disorders - The Indian Practitioner

फिजियोथेरेपी और शुगर कंट्रोल ही है मुख्य इलाज

फ्रोजन शोल्डर के इलाज का मुख्य उद्देश्य मरीज के कंधे का दर्द कम करना और जोड़ों की सामान्य गतिविधि को दोबारा प्राकृतिक रूप से वापस लाना होता है। इस समस्या से राहत दिलाने के लिए डॉक्टरों द्वारा शुरुआती दौर में दर्द और अंदरूनी सूजन को कम करने वाली कुछ आवश्यक दवाएं दी जा सकती हैं। हालांकि इस पूरी रिकवरी प्रक्रिया में फिजियोथेरेपी और नियमित रूप से की जाने वाली स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज ही सबसे अहम और असरदार भूमिका निभाती हैं। इसके साथ ही मरीजों को अपने खान-पान पर नियंत्रण रखकर ब्लड शुगर के स्तर को हमेशा सामान्य बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।

गंभीर और पुराने मामलों में जब दवाएं असर नहीं करती हैं, तब विशेषज्ञ डॉक्टर कंधे के जोड़ में विशेष इंजेक्शन लगाने या अन्य उन्नत चिकित्सा प्रक्रियाओं को अपनाने की सलाह देते हैं।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here