Dharsiwa Case: मोहम्मद याकुब/रायपुर। राजधानी रायपुर के ग्रामीण इलाके धरसीवा थाना क्षेत्र से सनसनी फैला देने वाले नाबालिग बालिका दुष्कर्म मामले में एक नया और बेहद चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। इस चर्चित और संवेदनशील मामले में तफ्तीश आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने दो और युवकों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें से एक स्थानीय युवक है और दूसरा एक स्थानीय पत्रकार बताया जा रहा है। पुलिस प्रशासन का दावा है कि इन दोनों ने आरोपी पक्ष और पीड़िता के परिवार के बीच कथित रूप से मामला रफा-दफा करने, सौदा कराने और अवैध रूप से पैसों की उगाही करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। हालांकि, पुलिस की इस ताजा कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सियासी उबाल आ गया है। इस गिरफ्तारी के विरोध में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरसीवा थाने पहुंचकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और पूरी कार्रवाई को सत्ता के दबाव में की गई पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करार दिया।
चौकी प्रभारी के निलंबन और दादा की गिरफ्तारी के बाद हुई ताजा कार्रवाई
उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले की शुरुआत तब हुई थी, जब सोशल मीडिया पर एक कथित वीडियो तेजी से वायरल हुआ था। इस वीडियो में पीड़ित नाबालिग बच्ची के सगे दादा आरोपी पक्ष से पैसे लेकर मामले में समझौता करते हुए दिखाई दे रहे थे। वीडियो के सामने आते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया था, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने त्वरित एक्शन लेते हुए तत्कालीन सिलयारी चौकी प्रभारी जितेंद्र दुबे को उनके पद से तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़िता के दादा सहित दो मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया था। इसी कड़ी में अब जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुलिस ने दो अन्य सहयोगियों को भी दबोचा है।
मामला उजागर करने वाले पत्रकार को ही फंसाया: कांग्रेस का गंभीर आरोप
दूसरी तरफ, इस गिरफ्तारी को लेकर विपक्ष और पुलिस आमने-सामने आ गए हैं। रायपुर ग्रामीण जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेंद्र (पप्पू) बंजारे के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरसीवा थाने का घेराव किया। कांग्रेस अध्यक्ष बंजारे ने पुलिसिया कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि गिरफ्तार किए गए पत्रकार उस्मान सैफी वास्तव में वही व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपनी निर्भीक पत्रकारिता के जरिए इस पूरे दुष्कर्म मामले और उसमें हो रहे भ्रष्टाचार को जनता और प्रशासन के सामने उजागर किया था। बंजारे का कहना है कि पत्रकार द्वारा तथ्यों को बेनकाब किए जाने के कारण ही विभाग को मजबूरन सिलयारी चौकी प्रभारी जितेंद्र दुबे को सस्पेंड करना पड़ा था। इसी बात की खुन्नस और कड़ा बदला लेने की नीयत से पुलिस प्रशासन ने पत्रकार को झूठे आरोपों में प्रताड़ित करने की मंशा से आरोपी बना दिया है, जो कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला और पूरी तरह से दुर्भावनापूर्ण कार्रवाई है।
कोर्ट ने दोनों आरोपियों को भेजा जेल, निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग तेज
इस पूरे राजनीतिक ड्रामे और विरोध-प्रदर्शन के बीच धरसीवा थाना पुलिस अपनी कानूनी कार्रवाई पर अड़ी रही। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उनके पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त तकनीकी और चश्मदीद साक्ष्य मौजूद हैं, जिसके आधार पर ही यह वैधानिक कदम उठाया गया है। पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद दोनों गिरफ्तार युवकों को स्थानीय न्यायालय (कोर्ट) में पेश किया, जहां से माननीय न्यायाधीश के आदेश पर दोनों को न्यायिक रिमांड पर जेल दाखिल कर दिया गया है। फिलहाल, क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। विपक्षी दल, स्थानीय पत्रकार संगठन और आम लोग इस पूरे घटनाक्रम की किसी उच्च स्तरीय स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच कराने और निलंबित चौकी प्रभारी के खिलाफ तत्काल नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज करने की मांग पर अड़े हुए हैं, जबकि पुलिस प्रशासन मामले में अभी और भी कड़ियां जोड़ने तथा जांच जारी रहने की बात कह रहा है।









