नई दिल्ली। मध्य प्रदेश और राजस्थान में कोल्ड्रिफ कफ सिरप पीने से हुई 26 बच्चों की मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज जनहित याचिका को खारिज कर दिया। वकील विशाल तिवारी ने इस याचिका में राष्ट्रीय न्यायिक आयोग या एक्सपर्ट कमेटी से जांच कराने की मांग की थी।
याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कफ सिरप पीने से बच्चों की मौत के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं और ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं। उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया कि इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए और जहरीले रसायन डाई एथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की बिक्री पर सख्त नियम बनाए जाएं।
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याचिका में पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने, विभिन्न राज्यों में दर्ज मुकदमे एक ही स्थान पर ट्रांसफर कर जांच कराने, दोषी कंपनियों के लाइसेंस रद्द करने और उनके संचालन पर सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की गई थी।
केंद्र सरकार ने इस याचिका का विरोध किया। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में कार्रवाई करने में सक्षम है और राज्य को जांच नहीं करने देना अविश्वास करना होगा।
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सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई और जस्टिस बीआर गवई ने याचिकाकर्ता से पूछा कि अब तक कितनी पीआईएल दाखिल की हैं। याचिकाकर्ता ने आठ से दस की संख्या बताई। इसके बाद कोर्ट ने बिना कोई टिप्पणी किए याचिका खारिज कर दी। इस फैसले के साथ ही मामले की जांच फिलहाल राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में ही बनी रहेगी।









