बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रही जंगली जानवरों की संदिग्ध मौतों और अवैध शिकार की घटनाओं को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश में वन्यजीव सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मीडिया रिपोर्ट्स का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में शुरू की है।
हाईकोर्ट का सख्त संदेश
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति बिभु दत्त गुरु की पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने राज्य के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सह मुख्य वन्यजीव वार्डन को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण को लेकर उठाए गए कदमों और हालिया घटनाओं पर विस्तृत जानकारी देनी होगी।
तेंदुए और बाइसन की मौत से बढ़ी चिंता
कोर्ट के समक्ष पेश रिपोर्ट्स में बताया गया कि हाल के दिनों में प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में वन्यजीवों की मौत की गंभीर घटनाएं सामने आई हैं। खैरागढ़-डोंगरगढ़ के बीच स्थित वन ग्राम बनबोड़ क्षेत्र में एक वयस्क तेंदुए की निर्मम हत्या कर दी गई। शिकारियों ने तेंदुए के पंजे, नाखून और जबड़े के दांत काटकर ले जाने की आशंका जताई गई है, जिससे अवैध वन्यजीव तस्करी की ओर इशारा मिलता है।
करंट से बाइसन की मौत
इसी तरह कबीरधाम जिले के भोरमदेव अभ्यारण्य अंतर्गत जामपानी क्षेत्र में करंट की चपेट में आने से दो बाइसन की मौत हो गई। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि शिकारियों ने जानबूझकर करंट बिछाकर बाइसन का शिकार किया। इसके अलावा मोतीनपुर और बोटेसूर गांव के बीच जंगल में भी एक तेंदुए का शव बरामद हुआ है।
अगली सुनवाई की तारीख तय
हाईकोर्ट ने इन घटनाओं को गंभीर मानते हुए अगली सुनवाई की तारीख 19 दिसंबर 2025 निर्धारित की है। अदालत ने संकेत दिए हैं कि यदि लापरवाही पाई गई तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है।









