CG News: कोरबा में हाथी का खूनी तांडव! खेत में घुसकर किसान को कुचलकर मारा, गांव में दहशत

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Korba Elephant Attack: कोरबा हाथी हमला एक बार फिर छत्तीसगढ़ में इंसान और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की गंभीर तस्वीर सामने लेकर आया है। करतला वन परिक्षेत्र के बड़मार गांव में जंगली हाथी के हमले में एक ग्रामीण की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में डर का माहौल है और आसपास के किसान खेतों में जाने से भी घबरा रहे हैं।

कोरबा हाथी हमला उस समय हुआ जब बड़मार गांव निवासी जगेश्वर सिंह राठिया अपने खेत में काम करने गए थे। इसी दौरान उनका सामना जंगली हाथी से हो गया। प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार हाथी ने उन पर हमला कर दिया और गंभीर रूप से कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।घटना की सूचना मिलते ही परिजन और ग्रामीण बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे।

वन विभाग ने शुरू की कार्रवाई
कोरबा हाथी हमला की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। शासन के प्रावधानों के तहत मृतक के परिजनों को तत्काल सहायता के रूप में 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई है। साथ ही नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग उठाई
इस घटना के बाद कोरबा हाथी हमला को लेकर ग्रामीणों में गहरी चिंता है। गांव के लोगों का कहना है कि इलाके में जंगली हाथियों की आवाजाही लगातार बढ़ रही है, जिससे हर समय जान का खतरा बना रहता है।किसानों का कहना है कि खेती का मौसम चल रहा है और उन्हें रोज खेतों में जाना पड़ता है। ऐसे में वन विभाग को गश्त बढ़ाने, हाथियों की निगरानी करने और समय रहते लोगों को अलर्ट करने की व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए।

प्रदेश में बढ़ रहा मानव-हाथी संघर्ष
कोरबा हाथी हमला कोई अकेली घटना नहीं है। छत्तीसगढ़ के कई जिलों में पिछले कुछ वर्षों से जंगली हाथियों का मूवमेंट लगातार बढ़ा है। कोरबा, रायगढ़ के धर्मजयगढ़, सरगुजा, सूरजपुर, जशपुर और बलरामपुर जैसे जिले इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित माने जाते हैं।इन क्षेत्रों में हाथी अक्सर जंगलों से निकलकर गांवों और खेतों तक पहुंच जाते हैं, जिससे जान-माल और फसलों को नुकसान होता है।

पांच साल में 330 से ज्यादा लोगों की मौत
वन विभाग के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, कोरबा हाथी हमला जैसी घटनाओं में पिछले पांच वर्षों के दौरान पूरे छत्तीसगढ़ में हाथियों के हमलों से 330 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। इसके बावजूद मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं पूरी तरह नहीं थम पाई हैं।विशेषज्ञों का मानना है कि हाथियों के प्राकृतिक आवास में बदलाव, भोजन की कमी और जंगलों में बढ़ती मानवीय गतिविधियां भी इस संघर्ष की बड़ी वजह हैं। फिलहाल वन विभाग प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने और लोगों को सतर्क रहने की अपील कर रहा है।

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