CG News: बीजापुर में सुरक्षा बलों की बड़ी कामयाबी! 49 लाख के 8 इनामी माओवादी ने छोड़ी बंदूक

Bijapur Naxalite Surrender: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से बीजापुर नक्सली सरेंडर की बड़ी खबर सामने आई है। नक्सल विरोधी अभियान के तहत सुरक्षा बलों को उस समय अहम सफलता मिली, जब कुल 49 लाख रुपये के इनामी 8 माओवादियों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। बीजापुर नक्सली सरेंडर की इस कार्रवाई में झारखंड पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

बीजापुर नक्सली सरेंडर के तहत आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी लंबे समय से नक्सली संगठन के सक्रिय सदस्य थे। इनमें डिविजनल कमेटी सदस्य (DVCM) और एरिया कमेटी सदस्य (ACM) स्तर के कैडर भी शामिल हैं। खास बात यह है कि सरेंडर करने वालों में 5 महिला नक्सली भी शामिल हैं।सभी ने सुरक्षा बलों के सामने हथियार सौंपते हुए सामान्य जीवन अपनाने की इच्छा जताई।

49 लाख रुपये का था कुल इनाम
बीजापुर नक्सली सरेंडर करने वाले आठों नक्सलियों पर कुल 49 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इनमें अश्विन उर्फ लच्छू, रंगा उर्फ सोहन और दोबा माड़वी उर्फ राहत पर 8-8 लाख रुपये का इनाम था।इसके अलावा फगनी पोयम, सूरज मुन्नी चम्पिया, हिड़मे कड़ती, बुधरी कुंजाम और सलमी चम्पिया पर 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। सभी लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों की सूची में शामिल थे।
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बस्तर के रहने वाले, झारखंड में थे सक्रिय
बीजापुर नक्सली सरेंडर की इस कार्रवाई की एक खास बात यह भी रही कि आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी मूल रूप से बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा जिले के निवासी हैं। नक्सली संगठन ने इन्हें झारखंड में सक्रिय जिम्मेदारियां दी थीं।सुरक्षा एजेंसियों के लगातार अभियान और बढ़ते दबाव के बाद इन सभी ने संगठन छोड़ने का फैसला लिया।

सरकार की पुनर्वास नीति का मिलेगा लाभ
बीजापुर नक्सली सरेंडर करने वाले सभी माओवादियों को छत्तीसगढ़ शासन की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सहायता दी जाएगी। इसके अंतर्गत आर्थिक मदद, कौशल विकास प्रशिक्षण, आवास, शिक्षा, स्वरोजगार और रोजगार से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।सरकार का उद्देश्य इन लोगों को सम्मानजनक जीवन देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

सुरक्षा बलों की रणनीति लाई रंग
अधिकारियों के अनुसार बीजापुर नक्सली सरेंडर की सफलता के पीछे बीजापुर पुलिस, झारखंड पुलिस और CRPF के बीच बेहतर तालमेल रहा। लगातार चलाए गए अभियान, विश्वास निर्माण और संवेदनशील कार्यशैली के कारण नक्सलियों ने हथियार छोड़ने का निर्णय लिया।सुरक्षा बलों का कहना है कि ऐसे प्रयास आगे भी जारी रहेंगे ताकि अधिक से अधिक लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन की ओर लौट सकें।

बस्तर में बदलती तस्वीर के संकेत
बीजापुर नक्सली सरेंडर की इस घटना को बस्तर में बदलते माहौल का अहम संकेत माना जा रहा है। पिछले कुछ समय से लगातार कई नक्सली आत्मसमर्पण कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों का मनोबल बढ़ा है।विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पुनर्वास योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा और सुरक्षा अभियान इसी तरह चलते रहे, तो आने वाले समय में और भी नक्सली मुख्यधारा से जुड़ने का फैसला कर सकते हैं।

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