आरंग। Nishaanebaz.com-Arang Kurud Mahanadi Sand Mining: जीवनदायिनी महानदी के अस्तित्व पर लगातार हो रहे अनियंत्रित रेत दोहन के कारण गंभीर संकट मंडरा रहा है। इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर नई खदानों की मंजूरी देने की तैयारियां जारी हैं। आरंग तहसील के ग्राम कुरूद स्थित महानदी के खसरा नंबर 2742 के अंतर्गत 10 हेक्टेयर (लगभग 25 एकड़) क्षेत्र में रेत खनन की अनुमति के लिए आयोजित पर्यावरण जनसुनवाई में ग्रामीणों का भारी आक्रोश देखने को मिला। स्थानीय निवासियों और जनप्रतिनिधियों ने एक स्वर में चेतावनी दी है कि यदि इस खदान के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी किया गया, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे।
प्रशासनिक अनदेखी पर चिंता व्यक्त करते हुए ग्रामीणों ने बताया कि अनियंत्रित खनन से पूरे क्षेत्र का पर्यावरण बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कुरूद क्षेत्र में पहले 30 फीट की गहराई पर उपलब्ध जलस्तर अब गिरकर 150 फीट तक चला गया है। जल संकट के कारण किसान, जो पहले 1 बोर के सहारे 10 एकड़ में धान की फसल लेते थे, अब केवल 6 एकड़ में सिमटकर खेती करने को मजबूर हैं। इसके अलावा, नदी के तेजी से हो रहे कटाव के कारण 66 एकड़ में किए गए वृक्षारोपण के लगभग 1,000 पेड़ नदी में समा चुके हैं।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि खदानों में स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार देने के बजाय बाहरी राज्यों से आए मजदूरों से कार्य कराया जा रहा है। खदान के ठीक सामने स्थित स्कूल के पास से रेत से लदे अनियंत्रित और ओवरलोड हाईवा गुजरते हैं, जिससे लगातार उड़ती धूल और तेज रफ्तार के कारण जानलेवा दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है।
कुरूद और आसपास का पूरा क्षेत्र अवैध खनन व भंडारण के कारण रेत माफियाओं की रंजिश का केंद्र बन चुका है। पूर्व में भी यहां वर्चस्व की लड़ाई में गोलीकांड जैसी संगीन वारदातें हो चुकी हैं। अवैध वसूली और वर्चस्व को लेकर आए दिन हिंसक झड़पें होती हैं और विरोध करने पर ग्रामीणों व जनप्रतिनिधियों पर हमले किए जाते हैं, जिससे इलाके में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्रवाई केवल खानापूर्ति तक सीमित रहती है, जहां छोटे-मोटे चालान काटकर बड़े रेत माफियाओं को छोड़ दिया जाता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने स्पष्ट मांग रखी है कि वर्तमान में संचालित घाट को तुरंत बंद किया जाए और नई खदान की स्वीकृति प्रक्रिया व NOC को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। यदि शासन-प्रशासन ने जनभावनाओं और महानदी के संरक्षण की अनदेखी की, तो संपूर्ण क्षेत्र संगठित होकर व्यापक आंदोलन करेगा। वहीं जनसुनवाई के अंत में अधिकारी ग्रामीणों को बिना किसी ठोस आश्वासन के ही वापस लौट गए, जिसको लेकर स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी बनी हुई है।





