[nishaanebaz.com] Bageshwar Dham Relief: भोपाल/छतरपुर। नेपाल में आई भीषण त्रासदी के बीच बागेश्वर धाम ने पीड़ित परिवारों की मदद के लिए राहत सामग्री भेजी है। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के सहयोग से चार ट्रकों में राहत सामग्री भरकर नेपाल भेजी गई। वहीं, दूसरी ओर युवाओं को सकारात्मक सोच, आत्मचिंतन और मानसिक मजबूती की दिशा देने के उद्देश्य से बागेश्वर धाम में तीन दिवसीय ‘आत्मशुद्धि ध्यान शक्ति शिविर’ की शुरुआत हुई है। इसमें देशभर से करीब 750 सदस्य शामिल हुए हैं।
एक तरफ जहां बागेश्वर धाम की ओर से नेपाल के संकटग्रस्त परिवारों तक जरूरी सामान पहुंचाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर शिविर के माध्यम से युवा पीढ़ी को तकनीक और आधुनिक जीवनशैली के बीच मानसिक संतुलन बनाने का संदेश दिया जा रहा है।
चार ट्रकों में भरकर नेपाल भेजी गई राहत सामग्री
नेपाल में त्रासदी के बाद बड़ी संख्या में परिवारों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हुआ है। ऐसे में बागेश्वर धाम की ओर से राहत सामग्री एकत्र कर चार ट्रकों के जरिए नेपाल भेजी गई।राहत सामग्री में जरूरतमंद परिवारों की दैनिक आवश्यकताओं का ध्यान रखा गया है। इसमें चावल, दाल, मसाले, नमक, सोयाबीन तेल, पानी, बिस्किट, नमकीन और तिरपाल शामिल हैं। इसके अलावा थाली, गिलास और कटोरी जैसे जरूरी बर्तन भी भेजे गए हैं।
नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय को सौंपी गई सामग्री
बागेश्वर धाम के प्रतिनिधि मनोज त्रिवेदी ने नेपाल पहुंचकर नेपाल शिष्य मंडल के साथ राहत सामग्री नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय को सौंपी।बताया गया कि राहत सामग्री को जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाने के लिए स्थानीय स्तर पर समन्वय किया जा रहा है। बागेश्वर धाम की जन सेवा समिति की ओर से इस राहत अभियान को मानवीय सहायता के रूप में आगे बढ़ाया गया है।
जापान में थे पंडित धीरेंद्र शास्त्री, जानकारी मिलते ही दिए सेवा के निर्देश
बताया गया कि जब नेपाल में त्रासदी की जानकारी सामने आई, उस समय पंडित धीरेंद्र शास्त्री जापान में थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने नेपाल में रहने वाले नेपाली नागरिकों और अपने शिष्य मंडल से संपर्क किया।उन्होंने शिष्य मंडल को बिना समय गंवाए सेवा कार्य में जुटने और जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके बाद बागेश्वर धाम में राहत सामग्री एकत्र की गई और चार ट्रकों के माध्यम से नेपाल भेजी गई।
भारत-नेपाल संबंधों को बताया आत्मीयता का रिश्ता
पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारत और नेपाल के संबंधों को केवल सीमा तक सीमित नहीं बताते हुए इसे सदियों पुराना आत्मीय रिश्ता बताया। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी और भावनाओं का संबंध रहा है।उनके अनुसार पड़ोसी देश के संकट के समय उसके साथ खड़ा होना मानवता का हिस्सा है। इसी भावना के साथ बागेश्वर धाम की ओर से नेपाल के प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने की पहल की गई।
Gen Z को नई दिशा देने शुरू हुआ ‘आत्मशुद्धि ध्यान शक्ति शिविर’
नेपाल राहत अभियान के साथ ही बागेश्वर धाम में युवा पीढ़ी के लिए तीन दिवसीय ‘आत्मशुद्धि ध्यान शक्ति शिविर’ का शुभारंभ हुआ। शिविर में देशभर से करीब 750 सदस्य शामिल हुए हैं।शिविर का उद्देश्य युवाओं को योग, ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से सकारात्मक सोच और मानसिक मजबूती की दिशा में प्रेरित करना बताया गया है। तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम में युवाओं को अपने भीतर झांकने और जीवन को नए नजरिए से समझने पर जोर दिया जा रहा है।
ब्रह्म मुहूर्त में योग साधना से हुई शुरुआत
शिविर के पहले दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में योग साधना के साथ हुई। इसके बाद बागेश्वर सरकार ने शिविर में शामिल युवाओं को संबोधित करते हुए कार्यक्रम के नियम, उद्देश्य और अगले तीन दिनों की गतिविधियों की जानकारी दी।उन्होंने युवाओं से कहा कि यह शिविर सिर्फ तीन दिनों का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि स्वयं को समझने और जीवन को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर है। युवाओं को अनावश्यक मानसिक बोझ कम करने और खुद के लिए समय निकालने पर भी ध्यान देने की बात कही गई।
युवाओं में विवेक और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर जोर
बागेश्वर सरकार ने युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए कहा कि आने वाले समय में देश और दुनिया का नेतृत्व आज की युवा पीढ़ी करेगी। इसलिए युवाओं के भीतर केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि विवेक, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास भी जरूरी है।उन्होंने कहा कि जीवन को जिस तरह अभी जिया जा रहा है, जरूरी नहीं कि वही जीवन जीने का एकमात्र तरीका हो। आत्मचिंतन और साधना के जरिए जीवन को समझने के नए पहलुओं को जाना जा सकता है।
AI के बढ़ते प्रभाव पर बोले बागेश्वर सरकार
शिविर के दौरान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के बढ़ते प्रभाव का भी उल्लेख किया गया। बागेश्वर सरकार ने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और आने वाले समय में AI मानव जीवन और काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव ला सकती है।उन्होंने युवाओं से AI को केवल रोजगार के लिए चुनौती के रूप में न देखने की बात कही। उनके मुताबिक, यदि तकनीक इंसान के कई नियमित और दोहराव वाले काम संभालती है तो मनुष्य के पास अपने लिए समय निकालने, तनाव कम करने, रचनात्मकता बढ़ाने और समाज के लिए नए काम करने का अवसर भी बढ़ सकता है।
तकनीक के साथ मानसिक संतुलन का संदेश
उन्होंने कहा कि जब मशीनें बड़ी संख्या में काम संभालेंगी, तब इंसान के सामने यह सवाल ज्यादा महत्वपूर्ण होगा कि वह अपने समय और बुद्धि का इस्तेमाल किस तरह करता है। ऐसे समय में मनुष्यता, रचनात्मकता, आत्मचिंतन और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझना और भी जरूरी हो सकता है।बागेश्वर धाम में चल रहा यह शिविर इसी सोच के साथ युवाओं को आधुनिक तकनीक के साथ संतुलन बनाते हुए मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और नेतृत्व की दिशा देने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस तरह बागेश्वर धाम में एक ओर नेपाल के आपदा प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री भेजकर सेवा कार्य किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर युवा पीढ़ी के बीच आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए तीन दिवसीय शिविर आयोजित किया गया है।





