Kharora Mojo Mushroom Factory: खरोरा मोजो मशरूम फैक्ट्री बाल मजदूरी मामला छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बन गया है। रायपुर जिले के खरोरा स्थित मोजो मशरूम फैक्ट्री से 109 मजदूरों को मुक्त कराए जाने के करीब 199 दिन बीत चुके हैं, लेकिन फैक्ट्री संचालक विमल चेतान के खिलाफ अब तक पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं हुई है। इस देरी को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
खरोरा मोजो मशरूम फैक्ट्री बाल मजदूरी मामला तब सामने आया जब महिला एवं बाल विकास विभाग और दिल्ली मानवाधिकार आयोग की टीम ने फैक्ट्री में छापेमारी की। इस दौरान कुल 109 मजदूर मिले, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे।विभाग के अनुसार इनमें 14 लड़के और 12 लड़कियां नाबालिग थीं। बच्चे असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से लाए गए थे। कुछ बच्चे स्थानीय क्षेत्रों के भी बताए गए।
बच्चों ने बताए दर्दनाक हालात
खरोरा मोजो मशरूम फैक्ट्री बाल मजदूरी मामला की जांच में बच्चों ने कई गंभीर बातें बताईं। बच्चों के अनुसार उन्हें कई महीनों से लेकर तीन साल तक बंद कमरों में रखा गया था।बताया गया कि एक कमरे में 10 से 15 बच्चों को रखा जाता था। बच्चों ने मारपीट और लड़कियों के साथ अभद्र व्यवहार जैसे आरोप भी लगाए। हालांकि इन आरोपों की जांच संबंधित एजेंसियों द्वारा की जा रही है।
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एफआईआर दर्ज कराने के लिए 15 बार पहुंचे अधिकारी
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों का कहना है कि खरोरा मोजो मशरूम फैक्ट्री बाल मजदूरी मामला में एफआईआर दर्ज कराने के लिए कई बार खरोरा थाना जाना पड़ा।अधिकारी संजय निराला के अनुसार करीब 15 बार से अधिक प्रयास किए गए, लेकिन शिकायत दर्ज नहीं हो सकी। दूसरी ओर थाना प्रभारी का कहना है कि जांच के दौरान आपराधिक घटना के पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले।
पहले भी सामने आ चुका है ऐसा मामला
यह पहला मौका नहीं है जब खरोरा मोजो मशरूम फैक्ट्री बाल मजदूरी मामला चर्चा में आया हो। नवंबर 2025 में भी इसी फैक्ट्री से 97 मजदूरों को मुक्त कराया गया था, जिनमें महिलाएं और नाबालिग शामिल थे।उस समय मामला दर्ज किया गया था, लेकिन कार्रवाई कमजोर रहने के आरोप लगे। इसी वजह से दोबारा बच्चों से काम कराए जाने को लेकर प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
चाइल्ड लेबर कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया
खरोरा मोजो मशरूम फैक्ट्री बाल मजदूरी मामला अब कानूनी प्रक्रिया में है। श्रम विभाग के अनुसार चाइल्ड लेबर कोर्ट में अभियोजन दर्ज किया गया है।नियमों के तहत पहली बार दोषी पाए जाने पर 20 हजार से 50 हजार रुपए तक जुर्माना और छह महीने तक की जेल हो सकती है। यदि दोबारा अपराध साबित होता है तो सजा और कड़ी हो सकती है।
प्रशासनिक जांच पर टिकी लोगों की नजर
खरोरा मोजो मशरूम फैक्ट्री बाल मजदूरी मामला ने बाल सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण एसपी श्वेता श्रीवास्तव ने बताया है कि मामले की कानूनी जांच की जा रही है।अब लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है और बच्चों को न्याय कब तक मिल पाता है।








