Wednesday, October 7, 2026
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CG News : रायगढ़ राजनीति में बवाल : कांग्रेस नेता का सौदेबाज़ी वाला ऑडियो वायरल, भाजपा के साथ ‘सेटिंग’ का खुलासा

गौरी शंकर गुप्ता/रायगढ़। कांग्रेस संगठन में नए जिला अध्यक्ष की नियुक्ति की हलचल के बीच रायगढ़ से एक राजनीतिक बम फटा है। एक युवा कांग्रेस नेता का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें वह भाजपा के वरिष्ठ विधायक और मंत्री से सीधे सौदेबाज़ी की बात करते सुनाई दे रहा है। ऑडियो के मुताबिक यह सौदा केवल शब्दों का नहीं, बल्कि कांग्रेस की विचारधारा और ईमानदारी का भी समझौता साबित हो रहा है।

भाजपा मंत्री से सिफ़ारिश, कांग्रेस में गद्दारी

ऑडियो में नेता अपने भाई के नगर निगम ठेके से जुड़ी दिक्कतें सुलझाने के लिए भाजपा मंत्री से ‘सिफ़ारिश’ की गुहार लगाता है। बदले में वह मंत्री को भरोसा देता है कि आने वाले नगर निगम चुनाव में कांग्रेस कोई चुनौती नहीं देगी और आपके हित में काम करूंगा। इस वार्ड में बाद में भाजपा प्रत्याशी को बड़ी जीत मिली और कांग्रेस को ऐतिहासिक हार का सामना करना पड़ा।

वायरल ऑडियो यहां सुने –

विवादित इतिहास और पैटर्न

सूत्र बताते हैं कि यह वही युवा नेता है जो पहले भी विवादों में रहा है। स्वर्गीय नंदकुमार पटेल के समय में किरोड़ीमल नगर पंचायत चुनाव के दौरान भी उसका एक ऑडियो वायरल हुआ था, जिसमें उसने कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भाजपा प्रत्याशी का समर्थन करने का दबाव डाला था। परिणामस्वरूप कांग्रेस हारी और भाजपा जीती।

लगातार दो बार एक ही पैटर्न होने से यह संयोग नहीं, बल्कि राजनीतिक सौदेबाज़ी की परंपरा का संकेत है।

जिला अध्यक्ष पद में विवाद

अब यही नेता कांग्रेस के शहर जिला अध्यक्ष पद का प्रबल दावेदार बताया जा रहा है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, कुछ गुटीय नेता इस विवादित चेहरे को आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं। इससे कांग्रेस के लिए बड़ा सवाल यह बन गया है – क्या पार्टी अब भी ऐसे नेताओं को पुरस्कृत करेगी जो भाजपा के लिए ‘बैकडोर एजेंट’ की भूमिका निभा रहे हैं?

रायगढ़ से वायरल ऑडियो केवल एक व्यक्ति की हरकत नहीं, बल्कि संगठन की कमजोरी का आईना है। अगर कांग्रेस ने ईमानदार कार्यकर्ताओं को सम्मान नहीं दिया और सौदेबाज़ नेताओं पर लगाम नहीं लगाई, तो 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस का संगठन और जनता का विश्वास दोनों बिखर सकता है।

समाधान : ईमानदार नेताओं को आगे लाना और सौदेबाज़ नेताओं का बहिष्कार। वरना रायगढ़ से उठी यह गूँज पूरे छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला सकती है।

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