CG News : रायपुर : छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने आज रायपुर में महिला उत्पीड़न से जुड़े मामलों की सुनवाई की, जिसमें कई मामलों का निपटारा किया गया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बताया कि यह राजधानी रायपुर में 159वीं जनसुनवाई थी।
CG News : पति के अवैध संबंध का मामला: दूसरी महिला को नारी निकेतन भेजा गया
एक मामले में, एक महिला ने शिकायत की कि उसका पति पिछले छह महीने से उससे अलग रह रहा है क्योंकि वह दूसरी महिला के साथ अवैध संबंध में है। महिला ने बताया कि उसका पति उसे तलाक देने की धमकी दे रहा है। जिस दूसरी महिला के साथ उसका पति रह रहा है, उसका पहले ही अपने पति से तलाक हो चुका है और उसके माता-पिता ने भी उसे छोड़ दिया है।
इस स्थिति में, महिला आयोग ने दूसरी महिला को सुरक्षा देने और सुधरने का मौका देने के उद्देश्य से उसे नारी निकेतन भेजने का आदेश दिया। साथ ही, आयोग ने उसे सख्त हिदायत दी कि वह भविष्य में शिकायतकर्ता महिला और उसके परिवार के जीवन में दखलंदाजी नहीं करेगी। दोनों पक्षों के बीच सहमति बनने के बाद, इस मामले को बंद कर दिया जाएगा।
बच्चों की वापसी और गुजारा भत्ता का मामला
एक अन्य मामले में, एक महिला ने अपने बच्चों को वापस पाने के लिए शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने बताया कि उसके पति ने बच्चों को अनाथालय में छोड़ दिया था। महिला झाड़ू-पोछा का काम करके अपने बच्चों का पालन-पोषण कर रही है। उसका पति बच्चों और उसके लिए कभी-कभी ही पैसे देता है। महिला को उसके बच्चे वापस मिल चुके हैं। चूंकि दोनों पक्षों के बीच तलाक और भरण-पोषण का मामला पहले से ही अदालत में चल रहा है, इसलिए आयोग ने उन्हें समझाया कि अगर वे चाहें तो आयोग की मदद से सुलह कर सकते हैं।
पति-पत्नी के बीच शहर-गाँव का विवाद सुलझा
एक और मामले में, पति-पत्नी के बीच रहने की जगह को लेकर विवाद था। पति चाहता था कि उसकी पत्नी गाँव में रहकर खेती-बाड़ी करे, जबकि पत्नी शहर में पली-बढ़ी होने के कारण खेती नहीं कर सकती थी। उनके दो बच्चे भी हैं। आयोग ने पति को समझाया कि वह अपनी पत्नी और बच्चों को अपने साथ शहर में रखे, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हो गए।
भरण-पोषण की वसूली का मामला
एक महिला ने शिकायत की कि उसे अदालत से 10,000 रुपये मासिक भरण-पोषण का आदेश मिला है, लेकिन उसे अब तक पैसा नहीं मिला है। आयोग ने महिला को बताया कि चूंकि वह पहले ही अपने पति के खिलाफ मामला दर्ज करा चुकी है, इसलिए आयोग इस मामले की सुनवाई नहीं कर सकता। आयोग ने महिला को सलाह दी कि वह भरण-पोषण की वसूली के लिए सीधे अदालत में याचिका दायर करे। इस निर्देश के साथ, इस मामले को भी बंद कर दिया गया।













