CG BREAKING : 14 मंत्रियों की नियुक्ति मामला, क्या बीजेपी सरकार को हटाना होगा एक मंत्री? हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने दी अहम टिप्पणी

0
273
CG BREAKING
CG BREAKING

CG BREAKING : बिलासपुर : छत्तीसगढ़ सरकार में 14 मंत्रियों की नियुक्ति को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर मंगलवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बीडी गुरु की डिवीजन बेंच ने याचिकाकर्ता और राज्य सरकार के तर्क सुने। याचिका में आरोप है कि मौजूदा कैबिनेट की संख्या संविधान में तय 15% सीमा से अधिक है और यह अनुच्छेद 164(1A) का उल्लंघन है।

CG BREAKING : याचिकाकर्ता कांग्रेस कार्यकर्ता बसदेव चक्रवर्ती ने अधिवक्ता अभ्युदय सिंह के माध्यम से पीआईएल दायर की है। याचिका में 14वें मंत्री को असंवैधानिक ठहराते हुए पद से हटाने की मांग की गई है। पिछली सुनवाई में कोर्ट ने याचिकाकर्ता से उनका सामाजिक कार्यों का विवरण शपथ पत्र में मांगा था।

CG BREAKING : कोर्ट में क्या हुआ आज?

CG BREAKING : याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने कोविड-काल में सामाजिक सेवा की है और अखबारों में छपी तस्वीरें भी लगाई गई हैं। चीफ जस्टिस ने पूछा: “तस्वीर में आप कौन हैं?” और “इसमें डेट-टाइम क्यों नहीं है?” इस पर याचिकाकर्ता पक्ष ने माना कि तस्वीर में समय और तारीख नहीं है। इसके बाद, सरकार के वकीलों ने कोर्ट को बताया कि मंत्रिमंडल की अधिकतम सीमा से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जो मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार से जुड़ा है।

CG BREAKING : चीफ जस्टिस ने कहा, “जब सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है, तो वहीं से इसका निर्णय करवाइए। आज हम सोचकर बैठे थे कि इस मामले का फैसला कर देंगे, लेकिन अब मामला टलता है।”

CG BREAKING : याचिकाकर्ता को 3 हफ्ते का समय

CG BREAKING : याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट से दो हफ्तों का समय मांगा ताकि वे सुप्रीम कोर्ट के केस की स्थिति स्पष्ट कर सकें। इस पर कोर्ट ने तीन हफ्ते का समय देते हुए अगली सुनवाई तय कर दी।

CG BREAKING : अहम बिंदु

CG BREAKING : याचिकाकर्ता का दावा: 90 विधानसभा सीटों पर अधिकतम 13 मंत्री बनाए जा सकते हैं, लेकिन सरकार ने 14 मंत्री नियुक्त कर संविधान का उल्लंघन किया। सरकार का पक्ष: मामला पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए हाईकोर्ट को निर्णय नहीं देना चाहिए। कोर्ट की टिप्पणी: “अगर सुप्रीम कोर्ट में मामला न होता, तो आज ही फैसला सुना देते।” अब सभी की नजरें तीन हफ्ते बाद की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह तय हो सकता है कि मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के इंतजार में लंबित रहेगा या फिर हाईकोर्ट कोई ठोस फैसला सुनाएगा।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here