CG News: फिर गरमाया पाटेश्वर धाम विवाद! आदिवासी नेताओं को रास्ते में रोका गया, आंदोलन की चेतावनी

Rahul Goshwami

Balod Pateshwar Dham Dispute: बालोद पाटेश्वर धाम विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। बालोद जिले में पाटेश्वर धाम का निरीक्षण करने जा रहे आदिवासी समाज के प्रमुखों को पुलिस ने जामड़ी पाट जाने से रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनाव का माहौल बन गया और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया।

इस घटना के बाद बालोद पाटेश्वर धाम विवाद को लेकर प्रशासन और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के बीच बहस की स्थिति बन गई। समाज के लोगों का कहना है कि वे केवल स्थल की स्थिति देखने जा रहे थे, लेकिन उन्हें वहां तक पहुंचने नहीं दिया गया। वहीं प्रशासन कानून व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है।

वन भूमि और निर्माण कार्य बना विवाद की जड़
दरअसल बालोद पाटेश्वर धाम विवाद की शुरुआत तूएंगोंदी गांव की वन भूमि और पाटेश्वर धाम में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर हुई है। आदिवासी समाज का आरोप है कि वन भूमि पर कब्जा कर निर्माण किया जा रहा है और इस मामले में निष्पक्ष जांच की जरूरत है।

पहले भी हजारों लोगों ने किया था प्रदर्शन
इससे पहले भी बालोद पाटेश्वर धाम विवाद को लेकर सर्व आदिवासी समाज ने बड़ा आंदोलन किया था। बड़ी संख्या में लोग बालोद कलेक्ट्रेट पहुंचे थे और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस समय भी माहौल तनावपूर्ण हो गया था और स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा था।
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प्रशासन ने जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा
बढ़ते विवाद को देखते हुए प्रशासन ने आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की थी। इस दौरान बालोद पाटेश्वर धाम विवाद को लेकर समाज की मांग थी कि निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए और वन भूमि मामले की पूरी जांच की जाए।अपर कलेक्टर चंद्रकांत कौशिक ने प्रतिनिधियों को भरोसा दिया कि मामले की जांच कराई जाएगी। प्रशासन ने 20 जून तक का समय मांगते हुए निर्माण कार्य रोकने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही थी।

मांग पूरी नहीं होने पर फिर आंदोलन की चेतावनी
सर्व आदिवासी समाज के युवा प्रभाग के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष परते ने स्पष्ट कहा है कि यदि तय समय तक कार्रवाई नहीं हुई तो बालोद पाटेश्वर धाम विवाद को लेकर फिर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि कई बार शिकायत करने के बाद भी पहले कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिसके कारण समाज को आंदोलन करना पड़ा।

वन भूमि को अधिकार और पहचान से जोड़ रहा समाज
आदिवासी समाज का कहना है कि बालोद पाटेश्वर धाम विवाद सिर्फ जमीन का मामला नहीं बल्कि उनकी पहचान और पारंपरिक अधिकारों से जुड़ा विषय है। इसलिए इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।

20 जून के फैसले पर टिकी पूरे जिले की नजर
फिलहाल बातचीत के बाद स्थिति शांत है, लेकिन बालोद पाटेश्वर धाम विवाद का अंतिम समाधान अभी बाकी है। अब सभी की नजर 20 जून पर टिकी हुई है, क्योंकि इसी दिन तक प्रशासन ने जांच और आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया है।अगर तय समय में कोई स्पष्ट फैसला नहीं होता है तो बालोद जिले में एक बार फिर बड़े आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की स्थिति बन सकती है।

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