बुरहानपुर : फागुन की सुहानी बयार के बीच बुरहानपुर का गोकुल चंद्रमाजी मंदिर रविवार को पूरी तरह ब्रजमय नजर आया। मंदिर परिसर में “फाग खेलन बरसाने आए हैं…” और “मेरी चुनर में लग गयो दाग…” जैसे पारंपरिक फाग गीतों की गूंज सुनाई दी। श्रद्धालु भक्ति और रंगों के संग झूमते नजर आए।
फूलों की होली से हुई शुरुआत
फागुन उत्सव के तहत आयोजित छैल-छबीली होली की शुरुआत फूलों की होली से हुई। मंदिर परिसर में पुष्प वर्षा के बीच भक्तों ने राधा-कृष्ण के जयकारे लगाए। वातावरण पूरी तरह भक्तिरस में डूब गया और हर कोई वृंदावन की अनुभूति करता नजर आया।
लड्डुओं की बौछार और लट्ठमार की मस्ती
फूलों की होली के बाद हास्य रस से भरपूर छैल-छबीला मंचन हुआ। गोपियों और ग्वाल-बाल की झांकियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। जब रंग बरसे तो लड्डुओं की बौछार भी शुरू हो गई। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे पर लड्डू फेंककर अनोखे अंदाज में होली मनाई।
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भक्ति और उल्लास से सराबोर माहौल
मंदिर प्रमुख हरीकृष्ण मुखियाजी ने बताया कि हर वर्ष ब्रज की परंपरा के अनुसार यह आयोजन किया जाता है, ताकि भक्तों को वृंदावन जैसा अनुभव मिल सके। अंत में होली दहन की परंपरा निभाई गई और पूरा परिसर रंग-बिरंगे गुलाल से सराबोर हो गया।
फागुन की मस्ती, भक्ति की धारा और रंगों की छटा ने गोकुल चंद्रमाजी मंदिर को सचमुच ब्रजधाम में तब्दील कर दिया। भक्तों ने इसे यादगार और आध्यात्मिक अनुभव बताया।











