Amrish Puri Hollywood: भारतीय सिनेमा के इतिहास में खलनायिकी को एक नया आयाम देने वाले सदाबहार अभिनेता अमरीश पुरी (Amrish Puri) की रौबीली आवाज, बड़ी-बड़ी आंखें और बेमिसाल अभिनय के दीवाने केवल भारतीय दर्शक ही नहीं, बल्कि हॉलीवुड के बड़े-बड़े विधाता भी थे। दिग्गज हॉलीवुड फिल्ममेकर स्टीवन स्पीलबर्ग तो अमरीश पुरी को अपना सबसे पसंदीदा विलेन मानते थे। लेकिन स्वाभिमान और अभिनय के प्रति अपनी शर्तों पर जीने वाले अमरीश पुरी ने एक बार स्टीवन स्पीलबर्ग जैसे बड़े विधिक नाम का प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था। इस दिलचस्प वाकये का खुलासा खुद अमरीश पुरी ने अपनी ऑटोबायोग्राफी ‘द एक्ट ऑफ लाइफ’ (The Act of Life) में किया था, जो यह दर्शाता है कि कला के विधिक सम्मान के आगे उनके लिए हॉलीवुड की चकाचौंध भी फीकी थी।
रोल के लिए ऑडिशन देने से किया था साफ इनकार; बोले— “सेट पर आकर देखें मेरी असली एक्टिंग”
यह पूरा मामला स्टीवन स्पीलबर्ग की सुपरहिट हॉलीवुड फिल्म ‘इंडियाना जोन्स: टेम्पल ऑफ डूम’ (Indiana Jones: Temple of Doom) में मुख्य विलेन ‘मोला राम’ के किरदार से जुड़ा हुआ है। इस रोल के लिए अमरीश पुरी का विधिक स्क्रीन टेस्ट और ऑडिशन लेने के लिए हॉलीवुड के कास्टिंग एजेंट्स विशेष रूप से भारत आए थे। हालांकि, अमरीश पुरी ने ऑडिशन देने से साफ मना कर दिया। उन्होंने कास्टिंग डायरेक्टर्स से दो टूक शब्दों में कहा कि वह उनके ऑडिशन की छोटी सी क्लिप देखने के बजाय सेट पर आकर उनकी जीवंत और असली परफॉर्मेंस देखें। अमरीश पुरी के इस कड़े और स्वाभिमानी रवैये को देखकर मेकर्स भी हैरान रह गए और अंततः बिना किसी विधिक ऑडिशन के उन्हें ‘मोला राम’ का प्रतिष्ठित किरदार सौंपा गया, जिसमें उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनी अदाकारी का लोहा मनवाया।
जब सीन को जीवंत बनाने के लिए सेट पर स्मिता पाटिल को जड़ दिया था असली थप्पड़
अभिनय का चरम जुनून: अमरीश पुरी के किरदारों में दिखने वाली क्रूरता और संजीदगी केवल उनके हाव-भाव तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे दृश्य को पूरी तरह वास्तविक बनाने में विश्वास रखते थे। ऐसा ही एक चौंकाने वाला किस्सा श्याम बेनेगल की कालजयी विधिक फिल्म ‘भूमिका’ का है। फिल्म के एक दृश्य में अमरीश पुरी को अभिनेत्री स्मिता पाटिल (Smita Patil) के किरदार को बाहर जाने से रोकना था और पलटकर जवाब मिलने पर गुस्सा जाहिर करना था। दृश्य को बिल्कुल स्वाभाविक रूप देने के लिए अमरीश पुरी ने डायरेक्टर से विधिक अनुमति मांगी कि “क्या मैं सच में थप्पड़ मार दूं?” निर्देशक के हामी भरते ही उन्होंने स्मिता पाटिल को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया।
शॉक रह गई थीं स्मिता पाटिल, स्क्रीन पर उभर कर आया था सबसे नेचुरल रिएक्शन
अचानक पड़े इस थप्पड़ से सेट पर मौजूद सभी लोग और खुद स्मिता पाटिल पूरी तरह स्तब्ध (शॉक) रह गई थीं। थप्पड़ लगने के बाद स्मिता पाटिल के चेहरे पर जो दर्द, अविश्वास और विस्मय के भाव उभरे, वे पूरी तरह वास्तविक थे। अमरीश पुरी ने एक टीवी शो ‘जीना इसी का नाम है’ में इस संस्मरण को साझा करते हुए गर्व से कहा था कि वह रिएक्शन इतना लाजवाब और विधिक रूप से बेहतरीन था कि उसे फिल्म में साफ देखा जा सकता है। ऐसे ही कड़े और समझौतारहित प्रयोगों के कारण अमरीश पुरी आज भी भारतीय और वैश्विक सिनेमा के पटल पर एक अमर और सर्वश्रेष्ठ खलनायक के रूप में विधिक रूप से दर्ज हैं।









