पटना : आज यानी बुधवार को बिहार की राजधानी पटना में सुबह राजनीतिक गतिविधियाँ चरम पर पहुँच गईं। नई एनडीए सरकार के गठन से पहले सत्ता संतुलन, मंत्रालयों का बंटवारा और उपमुख्यमंत्री पद पर निर्णय लगभग तय माना जा रहा है। लेकिन असली दिलचस्पी इस बात पर टिकी है कि नई सरकार में किसे कितनी हिस्सेदारी मिलेगी।
Bihar Government Formation जहाँ जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार को 10वीं बार मुख्यमंत्री बनाए जाने का रास्ता साफ है और वे खुद शपथ ग्रहण की तैयारियों पर नज़र बनाए हुए हैं। वहीं आगामी 20 नवंबर को गांधी मैदान में होने वाले समारोह को लेकर एनडीए में उत्साह के साथ-साथ रणनीतिक हलचल भी जारी है।
बीजेपी की बढ़ी भूमिका, जेडीयू की मजबूरी
सूत्रों के अनुसार, एनडीए इस बार फिर “6 विधायक = 1 मंत्री” फॉर्मूला अपनाने जा रहा है, जिससे बीजेपी को सबसे बड़ा हिस्सा मिलेगा। 89 विधायकों के साथ बीजेपी स्पष्ट रूप से मजबूत स्थिति में है, जबकि जेडीयू को सत्ता में बने रहने के लिए राजनीतिक रूप से अब थोड़ा अधिक लचीलापन दिखाना पड़ रहा है।
उपमुख्यमंत्री पद के दोनों नाम बीजेपी से तय माने जा रहे हैं। इससे यह संकेत जाता है कि एनडीए में शक्ति संतुलन का केंद्र भाजपा है, जबकि जेडीयू की भूमिका स्थिर सरकार सुनिश्चित करने वाले सहयोगी की बन रही है।
कौन बनेगा स्पीकर, किसके पास आएंगे अहम मंत्रालय
Bihar Government Formation वहीं सूत्रों की मानें तो विधानसभा अध्यक्ष पद भी बीजेपी के खाते में जा सकता है। एनडीए की आंतरिक रणनीति के मुताबिक, नेतृत्व जातीय संतुलन को ध्यान में रख रहा है—यदि स्पीकर सवर्ण होगा तो एक डिप्टी सीएम ओबीसी/ईबीसी या दलित हो सकता है, और दूसरा सवर्ण। एक महिला उपमुख्यमंत्री की संभावना भी राजनीति में नई उत्सुकता पैदा कर रही है।
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मंत्रिमंडल में 18–20 नए चेहरे, NDA के छोटे सहयोगियों को भी जगह
सूत्र बताते हैं कि करीब 18–20 मंत्री शपथ ले सकते हैं। जेडीयू कोटे से सीमित चेहरों को मौका मिलेगा, जबकि अन्य सहयोगियों—हम, लोजपा (रा), वीआईपी—को प्रतीकात्मक हिस्सेदारी दी जा सकती है।
आज का शेड्यूल: एनडीए की दिशा होगी तय
- 11:00 AM: जेडीयू विधायक दल की बैठक
- 11:30 AM: बीजेपी विधायक दल की बैठक
- 3:30 PM: एनडीए विधानमंडल दल की बैठक
इन बैठकों के बाद मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्री पदों की सूची लगभग साफ़ हो जाएगी।
विश्लेषण: गठबंधन की मजबूरी और भविष्य की राजनीति
हालाँकि मुख्यमंत्री पद जेडीयू के पास है, लेकिन वास्तविक शक्ति-संतुलन बीजेपी के पक्ष में झुकता दिख रहा है। जेडीयू के लिए यह अवसर भी है और चुनौती भी—वहीं सत्ता में रहकर प्रभाव बनाए रखना, जबकि भाजपा राज्य में अपनी राजनीतिक जमीन और मजबूत कर रही है। आने वाले दिनों में यह गठबंधन बिहार की राजनीति की दिशा तय करेगा।













