Bihar Election Results/पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की मतगणना ने राज्य की राजनीति को एक बार फिर नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। रुझानों के अनुसार एनडीए 200 से अधिक सीटों पर आगे चल रहा है और बहुमत का आंकड़ा आराम से पार कर चुका है। लेकिन इस चुनाव का असली सवाल यह नहीं कि सरकार कौन बनाएगा—बल्कि यह कि नीतीश सरकार में बीजेपी की ताक़त और भूमिका क्या होगी?
सरकार बनना लगभग तय है, लेकिन राजनीति का सबसे बड़ा सवाल अभी भी अधूरा है—नीतीश कुमार सरकार बनाएंगे तो किस अंदाज़ में बनाएंगे? बीजेपी के साथ वैसे ही, ज्यादा ताकत देकर या बिल्कुल नए समीकरण के साथ?
नीतीश कुमार राजनीतिक समझ और समीकरणों के उस्ताद माने जाते हैं। वे अक्सर स्थिति के अनुसार ऐसा कदम उठा देते हैं जिसकी किसी को उम्मीद नहीं होती। यही वजह है कि बहुमत स्पष्ट होने के बावजूद पटना की गलियों में असली चर्चा “सरकार किसकी” नहीं, बल्कि “सरकार कैसी” होगी, इस पर है।
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Bihar Election Results देखा जाए तो इस बार बिहार चुनाव में एनडीए ने कमाल का प्रदर्शन किया है। इस गठबंधन 209 सीटों पर आगे चल रहा है। बीजेपी 96, जेडीयू 84, एलजेपी 20, हम 5, राष्ट्रीय लोक मोर्चा 4 सीटों पर आगे चल रही है।
नीतीश के बिना भी बहुमत का आंकड़ा
हालांकि एनडीए का प्रदर्शन इतना जबरदस्त रहा है कि वो नीतीश के बिना भी बहुमत का आंकड़ा पार कर रहा है। बता दें कि बिहार विधानसभा चुनाव में बहुमत का आंकड़ा 122 है। और एनडीए की 209 सीटों में से जेडीयू की 84 सीटें निकाल दें तो ये125 हो जा रहा है, जो बहुमत के लिए काफी है ।
Bihar Election Results देखा जाए तो, दशकों से बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार एक ऐसे नेता के रूप में उभरते रहे हैं, जो गठबंधन बदलने में माहिर माने जाते हैं और समय-समय पर अपने राजनीतिक कदमों से सभी को चौंकाते रहे हैं।
बीजेपी की बड़ी बढ़त, लेकिन सरकार की चाबी नीतीश के हाथ में
बीजेपी इस चुनाव में लगभग 90 से 100 सीटों पर आगे है, जो उसे गठबंधन के भीतर सबसे बड़ी पार्टी की स्थिति देती है। इसके बावजूद मुख्यमंत्री पद को लेकर किसी तरह का सवाल नहीं उठ रहा, क्योंकि एनडीए का चेहरा पहले से ही नीतीश कुमार तय थे।
Bihar Election Results फिर भी राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि इतनी बड़ी सीटों की बढ़त के बाद क्या बीजेपी सरकार में अपनी हिस्सेदारी और शक्ति बढ़ाने की मांग करेगी? और क्या नीतीश अपनी “संतुलन बनाने की कला” से एक बार फिर गठबंधन को अपने तरीके से चलाएंगे?
महागठबंधन दूर, पर समीकरणों पर नजर
महागठबंधन इस बार बहुत पीछे छूट चुका है, लेकिन बिहार की राजनीति में विपक्ष का कमजोर होना कभी भी सत्ता की स्थिरता की गारंटी नहीं रहा। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार हमेशा विकल्प खुला रखते हैं—और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
हालांकि मौजूदा परिस्थितियों में उनके बीजेपी से अलग होने की कोई संभावना नहीं दिखती। महिलाओँ के बड़े पैमाने पर समर्थन और एनडीए में जेडीयू के महत्व को देखते हुए नीतीश की भूमिका पहले से अधिक मजबूत हो गई है।
नई सरकार—नीतीश की, लेकिन अंदाज़?
- सबसे बड़ा सवाल यही है—नई सरकार में फैसलों की दिशा कौन तय करेगा?
- क्या बीजेपी अपने नंबर बल पर बड़ा हिस्सा चाहेगी?
- क्या नीतीश अपनी पारंपरिक “सुशासन मॉडल” को प्राथमिकता देंगे?
- या दोनों दल मिलकर एक संतुलित सत्ता संरचना तैयार करेंगे?
इन सबके बीच इतना तय है कि सरकार नीतीश की ही बनेगी, पर उसके चरित्र और चाल का फैसला आने वाले दिनों में होगा, और बिहार को अगले पांच वर्षों के राजनीतिक समीकरण का अंदाज़ धीरे-धीरे दिखने लगेगा।













