भोपाल : पश्चिम रेलवे के भोपाल डिपो में एक गंभीर और शर्मनाक घोटाले का खुलासा हुआ है। रेलवे से सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को सम्मान स्वरूप दिए जाने वाले चांदी के सिक्के असल में चांदी के नहीं, बल्कि तांबे के निकले हैं। इस खुलासे के बाद रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
लैब जांच में सामने आई सच्चाई
सिक्कों की गुणवत्ता पर संदेह होने के बाद रेलवे अधिकारियों ने उन्हें प्रयोगशाला जांच के लिए भेजा। जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 20 ग्राम वजन वाले कथित चांदी के सिक्के में चांदी की मात्रा महज 0.23 प्रतिशत थी। शेष हिस्सा तांबे का पाया गया, जिस पर ऊपर से चांदी की पॉलिश की गई थी।
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इंदौर की फर्म से हुई थी सप्लाई
जानकारी के अनुसार ये सिक्के इंदौर की फर्म मेसर्स वायबल डायमंड्स द्वारा सप्लाई किए गए थे। कुल 3,631 सिक्के भोपाल रेलवे डिपो को भेजे गए थे। प्रत्येक सिक्के की कीमत लगभग 2000 से 2200 रुपये बताई गई थी, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि यह घोटाला लाखों रुपये का हो सकता है।
सरकारी धन और सम्मान दोनों पर चोट
यह मामला केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है, बल्कि उन कर्मचारियों के सम्मान से भी जुड़ा है जिन्होंने वर्षों तक रेलवे की सेवा की। सम्मान के नाम पर इस तरह की धोखाधड़ी को लेकर कर्मचारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
FIR की तैयारी, जांच तेज
रेलवे प्रशासन ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए भोपाल के बजरिया थाने में संबंधित सप्लायर कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि सप्लाई से पहले गुणवत्ता परीक्षण में चूक कैसे हुई।











