भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित मिंटो हॉल में सोमवार को श्रम विभाग की विभागीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चारों श्रम संहिताओं के प्रावधानों को लेकर श्रमिक संगठनों, उद्योग प्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और शासकीय अधिकारियों के बीच साझा समझ विकसित करना तथा प्रदेश में उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संवाद को मजबूत करना था।
कार्यशाला में यूनिसेफ, बंधुआ मजदूरों के क्षेत्र में कार्यरत एनजीओ, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और श्रम विभाग के अधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल विशेष रूप से उपस्थित रहे और उन्होंने श्रमिक हितों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की।
बंधुआ मजदूरी उन्मूलन पर मंत्री का बयान
मीडिया से बातचीत करते हुए श्रम मंत्री प्रह्लाद पटेल ने बताया कि बंधुआ मजदूरी प्रथा उन्मूलन अधिनियम, 1976 को इस वर्ष 50 वर्ष पूरे हो गए हैं। उन्होंने कहा कि इस कुप्रथा के खिलाफ देश, समाज, कानून और प्रशासन ने मिलकर काम किया है। मंत्री के अनुसार मध्यप्रदेश में अब तक बंधुआ मजदूरी का केवल एक मामला सामने आया था, जिसमें दो मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को बंधुआ बनाया गया था और दोषियों पर मुकदमा दर्ज किया गया।
उन्होंने इसे प्रदेश के लिए बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यदि किसी राज्य में ऐसे मामले रिकॉर्ड नहीं होते हैं तो यह शासन-प्रशासन और समाज की संयुक्त सफलता को दर्शाता है।
तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला की घोषणा
श्रम मंत्री ने आगे बताया कि आने वाले समय में तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें बड़े, सूक्ष्म और लघु उद्योगों को अलग-अलग दिन आमंत्रित किया जाएगा। इसका उद्देश्य श्रम कानूनों के बेहतर पालन और श्रमिक कल्याण के लिए ठोस रोडमैप तैयार करना होगा।
कार्यशाला में उपस्थित विशेषज्ञों ने भी श्रमिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और श्रम कानूनों के प्रभावी पालन पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।













