Bhopal Beef Case 2026 : भोपाल। राजधानी भोपाल में गोमांस पकड़े जाने के मामले में नगर निगम के गलियारों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हड़कंप मच गया है। जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि जिस स्लॉटर हाउस (वधशाला) को पूर्व महापौरों ने रोक कर रखा था, उसे वर्तमान महापौर मालती राय के कार्यकाल में न केवल अनुमति मिली, बल्कि कई नियमों को ताक पर रखकर संरक्षण भी दिया गया।
पूर्व महापौरों की रोक और मालती राय की ‘रुचि’: सूत्रों और दस्तावेजों के अनुसार, पूर्व महापौर आलोक शर्मा और कृष्णा गौर स्लॉटर हाउस खोलने के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इस पर रोक लगा रखी थी। लेकिन अगस्त 2022 में मालती राय के महापौर बनते ही इसे हरी झंडी मिल गई। इतना ही नहीं, निर्माण कार्य पूरा करने के लिए नियमों के विरुद्ध दो बार समय सीमा (Extension) भी बढ़ाई गई।
20 साल का एग्रीमेंट और अफसरों की मिलीभगत: खुलासे में यह भी सामने आया है कि नगर निगम ने इस स्लॉटर हाउस के साथ 20 साल का लंबा एग्रीमेंट किया है। इस पूरी प्रक्रिया में महापौर, एमआईसी (MIC) सदस्य और तत्कालीन अफसरों की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है। पूर्व निगम आयुक्त वी.के. कोलसानी पर भी सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किन परिस्थितियों में इस टेंडर को मंजूरी दी गई।
आरोपी असलम कुरैशी के ‘ऊंचे’ कनेक्शन: मामले के मुख्य आरोपी असलम कुरैशी के राजनीतिक रसूख का भी पर्दाफाश हुआ है। बताया जा रहा है कि असलम के संबंध कई बड़े नेताओं से थे, जिसके दम पर वह टेंडर की शर्तों का खुलेआम उल्लंघन कर रहा था। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना और धोखाधड़ी के बावजूद, महापौर द्वारा अब तक न तो टेंडर निरस्त किया गया है और न ही धोखाधड़ी की एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई है।
उठते सवाल:
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जब पूर्व महापौरों ने रोक लगाई थी, तो मालती राय ने इसे चालू कराने में इतनी रुचि क्यों दिखाई?
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टेंडर की शर्तों के उल्लंघन के बाद भी कंपनी पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
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आरोपी असलम कुरैशी को किन नेताओं का वरदहस्त प्राप्त है?











