Gujarat Blast/भरूच (गुजरात): गुजरात के भरूच जिले के औद्योगिक क्षेत्र जीआईडीसी सायखा में मंगलवार देर रात एक दवा बनाने वाली कंपनी में जोरदार धमाका हुआ।इस हादसे में तीन कर्मचारियों की मौत हो गई, जबकि 24 लोग घायल हो गए।घायलों में से कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसा इतना भयंकर था कि आसपास की चार अन्य फैक्ट्रियों को भी नुकसान पहुंचा।
रात ढाई बजे हुआ भीषण विस्फोट
सूत्रों के अनुसार, मंगलवार देर रात करीब ढाई बजे विशाल फार्मा नामक कंपनी में अचानक बॉयलर फट गया। विस्फोट के बाद कंपनी के अंदर भीषण आग लग गई। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। आग लगने की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की छह गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया।
तीन की मौत, कई की हालत नाजुक
Gujarat Blast कंपनी में हादसे के वक्त दर्जनों कर्मचारी काम कर रहे थे।विस्फोट के कारण तीन की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 24 कर्मचारी झुलस गए।घायलों को नजदीकी भरूच सिविल हॉस्पिटल और अन्य निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, चार से पांच कर्मचारियों की हालत गंभीर बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
बिना अनुमति चल रही थी फैक्ट्री
सायखा गांव के सरपंच जयवीर सिंह ने हादसे को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं।उन्होंने कहा कि “यह फैक्ट्री बिना सरकारी अनुमति के चल रही थी,जिसकी शिकायत कई बार प्रशासन को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।” स्थानीय लोगों के मुताबिक, कंपनी में सुरक्षा मानकों की बार-बार अनदेखी की जाती थी।
जांच के आदेश, लेकिन उठे कई सवाल
Gujarat Blast भरूच प्रशासन ने हादसे के बाद उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे और राहत कार्यों का जायजा लिया।हालांकि, इलाके के लोगों का कहना है कि यह हादसा औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी को उजागर करता है। बीते कुछ वर्षों में गुजरात के कई औद्योगिक इलाकों में ऐसे हादसों की संख्या लगातार बढ़ी है, जिससे सरकार की औद्योगिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी का नतीजा
विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्रियल प्लांट्स में बॉयलर और सेफ्टी इक्विपमेंट की नियमित जांच नहीं होती।यदि कंपनियां निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन करतीं,तो ऐसे हादसों से कई जानें बचाई जा सकती थीं।











