Bhagwan Chandramouleshwar : राजेश व्यास/उज्जैन : विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर से कार्तिक–अगहन माह की अंतिम राजसी सवारी रविवार को भव्यता और श्रद्धा के साथ निकाली गई। दोपहर में सभा मंडप में भगवान चंद्रमौलेश्वर का वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजन कर उन्हें रजत पालकी में विराजित किया गया। इसके बाद मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल ने पालकी को सलामी दी और सवारी नगर भ्रमण के लिए रवाना हुई।
Bhagwan Chandramouleshwar : अंतिम सवारी का मार्ग लगभग पांच किलोमीटर तक बढ़ाया गया, जिसमें पूरे रास्ते दोनों ओर खड़े हजारों श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर दर्शन किए। भजन मंडलियां, पुलिस बैंड, मंदिर समिति का बैंड, डमरू दल और अश्वारोही दस्ते पूरे समय सवारी के साथ उपस्थित रहे, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय बना रहा।
Bhagwan Chandramouleshwar : शाम करीब 4 बजे सवारी महाकाल मंदिर से रवाना हुई और पारंपरिक मार्ग के साथ-साथ शहर के प्रमुख रास्तों से होते हुए आगे बढ़ी। रामघाट पर भगवान चंद्रमौलेश्वर का पारंपरिक पूजन एवं अभिषेक किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और मंत्रोच्चार तथा घंटा-घड़ियाल की गूंज ने घाट परिसर को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
Bhagwan Chandramouleshwar : सवारी रात में अपने निर्धारित मार्ग से होकर वापस मंदिर परिसर में पहुंची, जहां विश्राम कराया गया। अंतिम राजसी सवारी होने के कारण पूरे शहर में दिनभर उत्साह और श्रद्धा का विशेष माहौल रहा।













