सिंगरौली: सरकार जहां एक ओर बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ का संदेश दे रही है, वहीं सिंगरौली जिले के बरगवां थाना क्षेत्र से सामने आया मामला इन दावों पर सवाल खड़े करता है। यहां एक नाबालिग छात्रा से दिनदहाड़े छेड़छाड़, अपहरण की कोशिश और जान से मारने की धमकी के गंभीर आरोप लगे हैं, लेकिन शिकायत के कई दिनों बाद भी पुलिस की कार्रवाई न होने से लोगों में आक्रोश है।
स्कूल से घर लौटते वक्त हुई वारदात
पीड़िता (नाम परिवर्तित) के अनुसार, 24 दिसंबर 2025 की शाम करीब 6 बजे वह सीएम राइज स्कूल से घर लौट रही थी, तभी दो युवकों ने रास्ते में उसे रोक लिया। आरोप है कि आरोपियों ने उसका हाथ पकड़कर घसीटने और जबरन उठाने की कोशिश की। एक स्थानीय नागरिक के हस्तक्षेप से पीड़िता की जान बच सकी।
शिकायत के बाद भी नहीं दर्ज हुई एफआईआर
पीड़िता के परिजनों ने 25 दिसंबर को थाना बरगवां में लिखित शिकायत दी, लेकिन आरोप है कि न तो एफआईआर दर्ज की गई और न ही पीड़िता को कोई सुरक्षा दी गई। इसके उलट, आरोपियों ने लगातार समझौते का दबाव बनाते हुए जान से मारने की धमकियां दीं।
29 दिसंबर को फिर धमकाने का आरोप
पीड़िता का कहना है कि पुलिस की निष्क्रियता से आरोपियों के हौसले और बढ़ गए और 29 दिसंबर को दोबारा डराने-धमकाने और छेड़छाड़ की कोशिश की गई। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
POCSO कानून पर भी सवाल
कानून के अनुसार नाबालिग से छेड़छाड़ के मामलों में POCSO एक्ट स्वतः लागू होता है और एफआईआर दर्ज करना पुलिस की कानूनी जिम्मेदारी है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर बरगवां पुलिस अब तक खामोश क्यों है।
पुलिस का पक्ष
इस पूरे मामले पर बरगवां थाना प्रभारी ने बताया कि शिकायत एसपी कार्यालय से प्राप्त हुई है और जांच के बाद दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।













