Graded Investment Limits : FDI नियमों में बड़े सुधार की तैयारी : सरकार ला सकती है ‘ग्रेडेड निवेश सीमा’ का नया फॉर्मूला

0
78

Graded Investment Limits : नई दिल्ली (15 फरवरी 2026): भारत सरकार अपने विदेशी निवेश ढांचे को समकालीन और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाने के लिए विदेशी मुद्रा प्रबंधन (FEMA) नियमों की व्यापक समीक्षा कर रही है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026-27 में की गई घोषणा के अनुरूप, सरकार अब निवेश की सीमाओं और परिभाषाओं में महत्वपूर्ण बदलाव लाने की तैयारी में है।

ग्रेडेड निवेश सीमा (Graded Investment Limits)

वर्तमान में, विदेशी निवेश की सीमाएं पूरी तरह से निर्धारित ‘सेक्टरल कैप’ (जैसे बीमा में 100% या रक्षा में 74%) पर आधारित होती हैं। प्रस्तावित सुधारों के तहत, कंपनियों को समग्र सेक्टरल कैप के भीतर अपनी स्वयं की ‘ग्रेडेड लिमिट’ निर्धारित करने की अनुमति दी जा सकती है। इससे भारतीय कंपनियों को विदेशी प्रतिस्पर्धा के बीच अपना रणनीतिक नियंत्रण और बाजार हिस्सेदारी बनाए रखने में मदद मिलेगी, खासकर बैंकिंग, रक्षा और टेलीकॉम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में।

यूनिफॉर्म FDI परिभाषा

सरकार सूचीबद्ध (Listed) और गैर-सूचीबद्ध (Unlisted) कंपनियों के लिए FDI की परिभाषा को एक समान बनाने पर विचार कर रही है।

  • वर्तमान नियम: गैर-सूचीबद्ध कंपनी में कोई भी विदेशी इक्विटी निवेश FDI माना जाता है। वहीं, सूचीबद्ध कंपनी में 10% या उससे अधिक की हिस्सेदारी को FDI और 10% से कम को FPI (पोर्टफोलियो निवेश) माना जाता है।

  • प्रस्तावित बदलाव: दोनों प्रकार की कंपनियों के लिए परिभाषा को संरेखित (Align) किया जाएगा ताकि नियामक जटिलताएं कम हों।

डाउनस्ट्रीम निवेश और स्पष्टता

सरकार डाउनस्ट्रीम निवेश (जब एक विदेशी निवेश वाली भारतीय कंपनी किसी दूसरी भारतीय कंपनी में निवेश करती है) से संबंधित नियमों को भी सुव्यवस्थित करने पर काम कर रही है। इसके अलावा, निवासियों और गैर-निवासियों के बीच शेयर हस्तांतरण के लिए प्राइसिंग गाइडलाइंस (मूल्य निर्धारण दिशानिर्देशों) पर विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किए जा सकते हैं।

Share The News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here