नई दिल्ली – सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस फाउंडेशन द्वारा संचालित वनतारा वाइल्डलाइफ रेस्क्यू एंड रिहैबिलिटेशन सेंटर की जांच के लिए सोमवार को एक विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का आदेश दिया। यह आदेश हथिनी माधुरी की शिफ्टिंग को लेकर उठे विवाद और पशु अधिकारों से संबंधित दो जनहित याचिकाओं के आधार पर दिया गया।
सर्वोच्च अदालत ने कहा कि यह टीम 12 सितंबर तक अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसके बाद 15 सितंबर को अगली सुनवाई होगी।
चार सदस्यीय SIT में कौन शामिल है?
- जस्टिस जे. चेलमेश्वर – सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश (अध्यक्ष)
- जस्टिस राघवेंद्र चौहान – उत्तराखंड व तेलंगाना हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश
- हेमंत नागराले – पूर्व पुलिस आयुक्त, मुंबई
- अनीश गुप्ता – अतिरिक्त आयुक्त, सीमा शुल्क विभाग
जांच का मुख्य उद्देश्य:
- वनतारा सेंटर में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम का पालन हो रहा है या नहीं
- जानवरों को भारत व विदेश से लाने की प्रक्रिया की वैधता
- सेंटर की संचालन प्रणाली की पारदर्शिता
क्या है मामला?
याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि कोल्हापुर के मंदिर से हथिनी माधुरी को वनतारा सेंटर ले जाया गया, जो नियमों के उल्लंघन और धार्मिक आस्था से जुड़ा मामला है। हथिनी को स्थानीय लोग ‘महादेवी’ के रूप में पूजते हैं।
वनतारा का बयान:
वनतारा की ओर से जारी बयान में कहा गया—
- “हम सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं और जांच में पूरा सहयोग देंगे। हमारा केंद्र पशुओं के संरक्षण, पुनर्वास और देखभाल के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”













