Abhanpur News: अभनपुर। छत्तीसगढ़ के अभनपुर क्षेत्र में सामने आए बेशकीमती साल लकड़ी तस्करी मामले की जांच अब लगातार गहराती जा रही है। हाल ही में वन विभाग की राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने अभनपुर क्षेत्र में छापेमार कार्रवाई करते हुए तीन अवैध आरा मिलों को सील किया था। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में कई नए पहलुओं की जांच शुरू हो गई है और तस्करी नेटवर्क को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
विधायक इंद्र कुमार साहू ने मांगी निष्पक्ष जांच
Abhanpur News: मामले के सामने आने के बाद अभनपुर विधायक इंद्र कुमार साहू ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा था कि पूरे प्रकरण की पारदर्शी, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या तस्कर की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ बिना किसी दबाव के सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।विधायक ने यह भी कहा कि वन संपदा की तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों को बचाने का कोई प्रयास नहीं होना चाहिए।
वन अमले की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
इस बीच विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से यह चर्चा भी सामने आ रही है कि पूरे मामले में अभनपुर वन परिक्षेत्र के रेंजर, डिप्टी रेंजर और संबंधित बीट गार्ड की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। सूत्रों का दावा है कि मामले को दबाने की कोशिशें भी हुईं, लेकिन उच्च स्तर पर निगरानी और कार्रवाई के चलते जांच आगे बढ़ती रही।हालांकि, इन दावों की वन विभाग की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, इसलिए इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
आसपास के क्षेत्रों में भी अवैध लकड़ी भंडारण की चर्चा
Abhanpur News: सूत्रों के अनुसार अभनपुर क्षेत्र के आसपास के कई गांवों में अभी भी साल सहित अन्य बेशकीमती एवं प्रतिबंधित लकड़ियों का अवैध भंडारण किए जाने की चर्चा है। इसके अलावा नवापारा वन परिक्षेत्र में भी बड़ी मात्रा में लकड़ी जमा होने की बातें सामने आ रही हैं।हालांकि, इन जानकारियों की भी अभी तक किसी सक्षम सरकारी एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और यह जांच का विषय है।
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जांच की दिशा पर टिकी सभी की निगाहें
Abhanpur News: अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या वन विभाग इस पूरे तस्करी नेटवर्क की तह तक पहुंचकर सभी जिम्मेदार लोगों की पहचान करेगा। यदि जांच में किसी अधिकारी या कर्मचारी की भूमिका सामने आती है, तो क्या उनके खिलाफ भी समान रूप से कठोर कार्रवाई होगी या मामला केवल निचले स्तर तक ही सीमित रह जाएगा।
फिलहाल, तीन अवैध आरा मिलों पर हुई कार्रवाई के बाद यह मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोगों की निगाहें अब वन विभाग की अगली कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों पर टिकी हैं।







