Indore Congress Women Exclusion : इंदौर। शहर कांग्रेस की हाल ही में घोषित कार्यकारिणी में महिलाओं को पर्याप्त प्रतिनिधित्व न मिलने का मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गरमा गया है। भाजपा के शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने इस गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी को एक खुला पत्र लिखकर अपनी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। सुमित मिश्रा ने देवी अहिल्याबाई होलकर की पावन नगरी का संदर्भ देते हुए कांग्रेस की 20 से अधिक वरिष्ठ महिला नेत्रियों के नामों का उल्लेख किया और सवाल उठाया कि आखिर क्यों इनमें से किसी भी मातृशक्ति को संगठन में उचित पद के लायक नहीं समझा गया।
प्रियंका गांधी को संबोधित करते हुए सुमित मिश्रा ने उनके चर्चित नारे ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ की याद दिलाई। उन्होंने पत्र में लिखा कि यह बड़े ही दुख का विषय है कि एक ओर आप महिला सशक्तिकरण की बात करती हैं, वहीं दूसरी ओर आपकी ही पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने इंदौर में महिला शक्ति को हाशिए पर धकेल दिया है। मिश्रा ने कटाक्ष करते हुए कहा कि इंदौर में शहर अध्यक्ष और नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष जैसे दो महत्वपूर्ण पद एक ही व्यक्ति के पास केंद्रित हैं, जो पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र और महिला प्रतिनिधित्व की कमी को दर्शाता है।
भाजपा अध्यक्ष ने अपने पत्र में स्पष्ट रूप से मांग की है कि देश की आधी आबादी के प्रतिनिधित्व पर कांग्रेस की चुप्पी को देखते हुए उन्हें यह बीड़ा उठाना पड़ा है। उन्होंने प्रियंका गांधी से आग्रह किया है कि वे मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को निर्देशित करें कि वे एक ही व्यक्ति के पास मौजूद दो पदों में से किसी एक पद से इस्तीफा दिलवाकर वहां किसी योग्य और सक्षम महिला नेत्री को अवसर दें। सुमित मिश्रा ने सुझाव के तौर पर पार्षद विनीतिका यादव का नाम भी प्रस्तावित किया है ताकि कांग्रेस पार्टी महिला उपेक्षा के इस कथित पाप का प्रायश्चित कर सके।
इस पत्र के सामने आने के बाद इंदौर की राजनीति में महिलाओं के सम्मान और सांगठनिक पदों पर उनकी भागीदारी को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। भाजपा ने इस मुद्दे के जरिए कांग्रेस को उसके अपने ही नारों पर घेरने की कोशिश की है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व इस पर क्या रुख अपनाता है और क्या कार्यकारिणी में किसी तरह के बदलाव की संभावना बनती है। फिलहाल सुमित मिश्रा का यह पत्र सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है और कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे पर सुगबुगाहट तेज हो गई है।











