AIIMS Raipur Staff Shortage : रायपुर/नई दिल्ली (24 मार्च 2026)। छत्तीसगढ़ के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान एम्स (AIIMS) रायपुर की बदहाल व्यवस्था और स्टाफ की भारी कमी का मामला मंगलवार को राज्यसभा में गूँजा। शून्यकाल के दौरान राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम ने केंद्र सरकार का ध्यान खींचते हुए बताया कि एम्स रायपुर खुद ‘बीमार’ चल रहा है, जिसका खामियाजा प्रदेश के गरीब मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।
एम्स से मेकाहारा का सफर: इलाज नहीं, केवल रेफरल?
सांसद नेताम ने सदन को बताया कि एम्स रायपुर में गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।
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बेड की किल्लत: जब भी किसी गंभीर मरीज को भर्ती करने की जरूरत होती है, तो अक्सर ‘बेड उपलब्ध नहीं है’ कहकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है या मेकाहारा (मेमोरियल मेडिकल कॉलेज) रेफर कर दिया जाता है।
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चिंताजनक स्थिति: देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार एम्स की यह स्थिति प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करती है।
आंकड़ों में एम्स की बदहाली: 1600 से अधिक पद खाली
सांसद ने सदन के पटल पर रिक्त पदों का चौंकाने वाला ब्यौरा पेश किया:
| श्रेणी | स्वीकृत पद | कार्यरत | रिक्त पद |
| चिकित्सक (Doctors) | 305 | 190 | 115 |
| अन्य स्टाफ (Nursing/Tech/Admin) | 3,884 | 2,387 | 1,497 |
| कुल रिक्तियां | – | – | 1,612 |
उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और सर्जरी जैसे अति-महत्वपूर्ण विभाग डॉक्टरों की कमी से सबसे ज्यादा जूझ रहे हैं। स्टाफ की कमी के कारण ओपीडी में घंटों लंबी कतारें, ऑपरेशनों में महीनों की वेटिंग और जांच प्रक्रियाओं में भारी विलंब अब आम बात हो गई है।
केंद्र सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग
फूलोदेवी नेताम ने केंद्र सरकार से मांग की कि एम्स रायपुर में डॉक्टरों, नर्सों और तकनीकी स्टाफ के सभी रिक्त पदों को युद्धस्तर पर भरा जाए। साथ ही संस्थान में बेड की क्षमता बढ़ाई जाए ताकि दूर-दराज से आने वाले मरीजों को भटकना न पड़े। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आम जनता का इस प्रीमियर संस्थान से भरोसा उठ जाएगा।











