Chhattisgarh Assembly : छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 10वें दिन सदन में कई मुद्दों पर तीखी बहस देखने को मिली। गौवंश, कृत्रिम गर्भाधान और चिराग योजना को लेकर पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायक के निशाने पर आ गए। वहीं अलसी बीज वितरण, मंदिरों के जीर्णोद्धार और नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन को लेकर भी सरकार को सवालों का सामना करना पड़ा। देखिए सदन की कार्यवाही पर ये खास रिपोर्ट।
Chhattisgarh Assembly : प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने प्रदेश में दुग्ध उत्पादन और गौवंश की स्थिति को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि क्या छत्तीसगढ़ दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर है, प्रदेश में कुल गौवंशीय पशुओं की संख्या कितनी है और प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता क्या है।
जवाब में पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम ने बताया कि 2019 की 20वीं पशु संगणना के अनुसार राज्य में करीब 99.84 लाख गौवंशीय पशु हैं। लेकिन दुग्ध उत्पादन के मामले में छत्तीसगढ़ अभी आत्मनिर्भर नहीं है।
उन्होंने बताया कि भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के अनुसार प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 300 ग्राम दूध उपलब्ध होना चाहिए, जबकि राज्य में यह आंकड़ा केवल 194 ग्राम प्रतिदिन है।
मंत्री ने बताया कि राज्य में पशुओं के कृत्रिम गर्भाधान के लिए 1585 संस्थाओं के माध्यम से कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।करीब 800 प्रशिक्षित निजी कृत्रिम गर्भाधान कार्यकर्ता भी काम कर रहे हैं।
वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच लगभग 16.93 लाख कृत्रिम गर्भाधान किए गए हैं, जिस पर करीब 1071 करोड़ रुपये की लागत आई है।
चिराग परियोजना को लेकर मंत्री ने बताया कि यह योजना 12 फरवरी 2021 से लागू की गई थी, जिसकी अवधि जुलाई 2026 तक तय थी। लेकिन अपेक्षित प्रगति नहीं होने के कारण केंद्र सरकार ने 26 मार्च 2025 से इस परियोजना की गतिविधियां बंद कर दीं।इस मंत्री ने कहा “जो भी त्रुटियां सामने आएंगी, उनकी जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।”
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेश में गौवंश तस्करी और पशुओं की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई।उन्होंने पूछा कि छोटे पशुओं को दूध उत्पादन के लिए तैयार करने की सरकार की क्या योजना है और टीकाकरण की सफलता दर कितनी है।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने चिराग परियोजना को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि वर्ल्ड बैंक से मिली राशि आखिर क्यों सरेंडर करनी पड़ी। मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि कोविड महामारी के कारण योजना के तहत काम बहुत कम हो पाया और इसी वजह से राशि का उपयोग भी सीमित रहा।
सदन में रायगढ़ जिले में अलसी बीज वितरण का मामला भी गूंजा। कांग्रेस विधायक उमेश पटेल ने आरोप लगाया कि किसानों को दिए गए बीजों में भारी गड़बड़ी हुई और बड़ी मात्रा में उत्पादन रिजेक्ट कर दिया गया।उन्होंने पूछा कि किसानों को सही प्रशिक्षण क्यों नहीं दिया गया और बीज ग्रेडिंग की प्रक्रिया कैसे हुई। इस पर कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने स्वीकार किया कि उत्पादन अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ और कुछ कमियां सामने आई हैं। उन्होंने कहा कि मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
कांग्रेस विधायक इंद्र साव ने बलौदाबाजार-भाटापारा क्षेत्र में मंदिरों के जीर्णोद्धार का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी मंदिरों के नाम पर चुनाव जीतती है लेकिन विकास कार्य नहीं होते। इस बयान पर सत्तापक्ष के विधायकों ने विरोध करते हुए कहा कि सरकार सनातन परंपरा के संरक्षण को लेकर गंभीर है।
पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि जिले से मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए 74 प्रस्ताव आए थे, जिनमें से 16 के लिए करीब 78 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सदन में नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन का मुद्दा भी उठा। कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि राज्य में नई शिक्षा नीति पूरी तरह लागू नहीं हो पाई है।
स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि नीति के अनुसार 22 छात्रों पर एक शिक्षक की व्यवस्था होनी चाहिए, जबकि छत्तीसगढ़ में औसतन 19 छात्रों पर एक शिक्षक है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अभी सभी स्कूलों में यह व्यवस्था लागू नहीं हो पाई है।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आरोप लगाया कि प्रदेश में हजारों स्कूल बंद कर दिए गए हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि स्कूल बंद नहीं किए गए हैं बल्कि उन्हें मर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के लगभग 87 प्रतिशत स्कूल अब एक ही परिसर में संचालित हो रहे हैं। मंत्री ने यह भी माना कि गांवों में निजी स्कूलों की संख्या तेजी से बढ़ रही है और सरकार सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए समीक्षा करेगी।
Chhattisgarh Assembly : कुल मिलाकर बजट सत्र के इस दिन सदन में कई अहम मुद्दों पर सरकार को विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के विधायकों के भी सवालों का सामना करना पड़ा।अब देखना होगा कि उठाए गए इन मुद्दों पर सरकार आगे क्या कदम उठाती है और जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है।










