निशानेबाज न्यूज़ डेस्क। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में एक नाबालिग द्वारा रचे गए झूठे अपहरण के मामले ने पुलिस जांच के दौरान एक बड़े साइबर नेटवर्क का खुलासा कर दिया। शुरुआत में नाबालिग ने अपने परिवार को फोन कर बताया कि उसका अपहरण हो गया है और उसे छोड़ने के बदले अपहरणकर्ताओं ने 3 लाख रुपए की फिरौती मांगी है। बाद में बातचीत के दौरान यह रकम घटकर 50 हजार रुपए तक पहुंच गई।
इस कॉल के बाद नाबालिग के बड़े भाई आशीष ठाकुर ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
दोस्तों के साथ मिलकर रची अपहरण की साजिश
मामले में नया मोड़ तब आया जब कुछ समय बाद नाबालिग ने फिर से फोन कर बताया कि अपहरणकर्ता उसे छोड़कर चले गए हैं। इस सूचना के बाद पुलिस को पूरे घटनाक्रम पर संदेह हुआ।
पुलिस ने तकनीकी मदद से नाबालिग की लोकेशन ट्रेस की और रास्ते में रोककर उससे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान नाबालिग ने स्वीकार किया कि उसने अपने दोस्तों के साथ मिलकर खुद के अपहरण की झूठी कहानी बनाई थी।
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म्यूल खाते के कारोबार से जुड़ा मामला
पुलिस जांच में सामने आया कि नाबालिग म्यूल अकाउंट यानी ऐसे बैंक खातों की खरीद-फरोख्त में शामिल था, जिनका इस्तेमाल ऑनलाइन ठगी और संदिग्ध लेन-देन में किया जाता है।
बताया जा रहा है कि वह म्यूल खाते बेचने के लिए धनबाद गया था। लेकिन जिन लोगों से उसकी डील तय हुई थी, उन्होंने खाते लेने से मना कर दिया और पहले दिए गए एडवांस पैसे वापस मांगने लगे।
पैसे लौटाने के डर से रची झूठी कहानी
एडवांस रकम लौटाने के दबाव से घबराकर नाबालिग ने अपने अपहरण की झूठी कहानी तैयार कर ली, ताकि परिवार से पैसे लेकर वह रकम लौटा सके। हालांकि पुलिस की जांच में पूरी साजिश का पर्दाफाश हो गया।
दो आरोपी गिरफ्तार, जांच जारी
इस मामले में पुलिस ने धनबाद और झारसुगुड़ा से दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो अन्य आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ बीएनएस की धारा 3(5), 318(4) और 62 के तहत मामला दर्ज किया है।
गिरफ्तार आरोपियों को कोर्ट में पेश किया जाएगा और पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान साइबर ठगी से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।











